अमेरिकी रक्षा मंत्री चक हेगेल ने कहा है कि अगर राष्ट्रपति बराक ओबामा हमले का आदेश देते हैं तो अमेरिकी सेनाएं सीरिया पर हमले के लिए तैयार हैं।
उन्होंने बीबीसी को बताया, “हमने साजोसामान को उचित जगह पर पहुंचा दिया है ताकि जो भी फैसला राष्ट्रपति लें, उस पर अमल किया जा सके।”
अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी कह चुके हैं कि इस बात के 'अकाट्य' सबूत हैं कि सीरिया ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया।
उधर, सीरिया के विदेश मंत्री वालिद मुआलेम ने रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि दुनिया का कोई भी देश अपने ही नागरिकों पर जनसंहार के हथियारों का इस्तेमाल नहीं कर सकता।
विनाशकारी नतीजे
इस बीच सीरिया के संकट पर चर्चा करने के लिए ब्रितानी संसद का सत्र बुलाया जा रहा है। ब्रिटेन रासायनिक हमले के बाद वहां सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहा है।
इससे पहले रूस ने कहा कि सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप का नतीजा क्षेत्र के लिए 'विनाशकारी' हो सकता है। पिछले सप्ताह सीरिया में हुए कथित रासायनिक हमले के बाद अमरीका सैन्य विकल्प पर विचार कर रहा है।
'हम तैयार हैं'
हेगेल ने कहा कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रपति ओबामा को सभी विकल्पों पर जानकारी दी है। उन्होंने कहा, “हमने उन्हें देखा है, हम तैयार हैं। हम आगे बढ़ने को तैयार हैं।”
हेगेल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के हथियार निरीक्षक जानकारी जुटा रहे हैं जिनसे पुष्टि होगी कि पिछले हफ्ते हुए रासायनिक हमले के लिए सीरिया की सरकार ही जिम्मेदार थी।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि ये काफ़ी हद तक साफ़ हो चुका है कि सीरिया में लोगों के खिलाफ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया।”
बंटी हुई सुरक्षा परिषद
उधर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया के मुद्दे पर स्पष्ट मतभेद बरकरार हैं। रूस और चीन, दोनों ही सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध कर रहे हैं जबकि ब्रिटेन और फ्रांस चेतावनी दे रहे हैं कि अगर 'मानवीय जरूरत आन पड़ी' तो संयुक्त राष्ट्र की अनदेखी की जा सकती है।
लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि ऐसे कोई संकेत नहीं है कि ऐसा कोई हमला हुआ या फिर इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सीरिया में मार्च 2011 में राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ शुरू हुए विद्रोह में अब तक एक लाख से ज्यादा लोग मारे गए हैं।
लेकिन पिछले हफ्ते कथित रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के बाद अंतरराष्ट्रीय बिरादरी सीरिया के मुद्दे पर खास तौर से सक्रिय हो गई है। सीरियाई विपक्ष का कहना है कि इस हमले में सैकड़ों लोग मारे गए।