म्यांमार में रोहिंग्याओं द्वारा गतवर्ष 25 अगस्त को 99 हिंदुओं के नरसंहार से संबंधित मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट पर अमेरिका ने पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए गहरी चिंता जताई है। अमेरिका ने कहा है कि म्यांमार के अराकान रोहिंग्या सॉल्वेशन आर्मी (आरसा) से जुड़े आतंकियों द्वारा रखाइन प्रांत में किए नरसंहार की विश्वसनीय और निष्पक्ष जांच अविलंब करने की आवश्यकता है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘आरसा द्वारा हिंदू ग्रामीणों की हत्या से संबंधित एमनेस्टी की रिपोर्ट से हम काफी दुखी हैं। इस रिपोर्ट ने रखाइन प्रांत में हुई हिंसा को लेकर विश्वसनीय और निष्पक्ष जांच की तत्काल आवश्यकता पर भी जोर दिया है। ठोस आधार पर जांच द्वारा सभी तथ्यों का निर्धारण करके म्यांमार हिंसा के दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके।
प्रवक्ता के मुताबिक, ‘अमेरिका इस तरह की रिपोर्ट का लगातार समर्थन करता रहेगा।’ इस सप्ताह की शुरूआत में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बंदूक और तलवारों से लैस रोहिंग्या मुस्लिमों और सशस्त्र विद्रोहियों का समूह 99 हिंदू महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के नरसंहार के साथ अन्य लोगों की हत्याओं के लिए भी जिम्मेदार है।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में सख्त अधिनियम पारित
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने म्यांमार में कथित नस्ली सफाए के मुद्दे के समाधान के लिए नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट, 2019 पारित किया है। अमेरिकी विदेश मामलों की समिति के चेयरमैन और सांसद एड रॉयस ने कहा कि यह प्रावधान बर्मी सैन्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाता है और अमेरिकी सेना के संयुक्त अभ्यास पर रोक लगाएगा। इस बीच बर्मा टास्क फोर्स ने एमनेस्टी की इस रिपोर्ट की निंदा की है।