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आईएस से निर्णायक युद्ध करने की तैयारी में अमेरिका

Sun, 09 Oct 2016 04:53 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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इस्‍लाम‌िक स्‍टेट - फोटो : bbc
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अमेरिका में अगले राष्ट्रपति को सत्ता सौंपने से पहले बराक ओबामा इराक और मोसुल में आईएस आतंकियों से निर्णायक युद्ध की तैयारी कर चुके हैं। इराक में सुन्नी आतंकवादियों के खिलाफ जीत की घोषणा से पहले ओबामा प्रशासन ने मोसुल शहर को दोबारा अपने कब्जे में लेने के लिए इराकी और अमेरिकी सेना को भी युद्ध की पूरी रणनीति से अवगत करा दिया है। इसके लिए चरणबद्ध योजना बनाई गई है।
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अब तक जो संकेत मिले हैं उनके मुताबिक मोसुल के लिए इस चरणबद्ध युद्ध में सबसे पहले इराकी सुरक्षाबलों द्वारा रमादी शहर को चारों तरफ से घेर लिया जाएगा। उसके बाद वर्ष 2003 में बगदाद की तरह अमेरिकी सेना यहां पूरी शहर में अपना ऑपरेशन शुरू कर देगी।

अगले चरण में इराकी सैन्य ब्रिगेडों द्वारा मोसुल से 40 किलोमीटर दूर पश्चिमी कैयारा एयर फील्ड को कब्जे में ले लिया जाएगा। इनमें प्रत्येक ब्रिगेड के पास 800 से 1600 सैनिक शामिल होंगे। यहां उत्तर व पूर्व में बैठे कुर्दिश लड़ाकों का भी उन्हें सहयोग मिलेगा। तीसरे चरण में मोसुल में संभावित आक्रमण के बाद वहां आतंकवाद से मुकाबला करने वाले इराकी कमांडो तैनात किए जाएंगे, जिन्हें अमेरिका द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
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अमेरिका इस ऑपरेशन में इराक को आधुनिक हेलीकॉप्टर समेत मिसाइलों का सहयोग भी देगा। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि मोसुल में इराकी आतंकवादियों समेत विदेशों से भर्ती किए गए करीब 3000 से 4500 लड़ाके मौजूद हैं। अमेरिका ने इस निर्णायक युद्ध में जीत के बाद मोसुल के अन्य धार्मिक कट्टरपंथी गुटों द्वारा भविष्य में कोई शांतिपूर्ण आंदोलन न छेड़ने के खिलाफ भी रणनीति बनाई है।
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अगले राष्ट्रपति की राह आसान करना चाहते हैं ओबामा

बराक - फोटो : www.theguardian.com
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के निकटतम सहयोगी ने बताया कि ओबामा की इच्छा देश के अगले राष्ट्रपति को कम से कम ऐसा प्रशासन देने की है जिसमें इराक के भीतर आईएस का प्रभाव काफी कम रह जाए।

ओबामा चाहते हैं कि जिस प्रकार का अल-कायदा का खतरा उन्होंने सत्ता संभालने के बाद देखा है वह उनके उत्तराधिकारी को न उठाना पड़े। हालांकि इस सहयोगी ने युद्ध के बाद मोसुल में शरणार्थी समस्या को लेकर कोई योजना नहीं बताई। 

युद्ध की इस रणनीति के बीच अमेरिका में मानवाधिकार से जुड़े लोगों को इस बात की चिंता सताने लगी है कि कहीं इस बार की जंग में ओबामा वही भूल न कर जाएं जो किसी समय जार्ज डब्ल्यू बुश ने की थी। उस भूल के चलते इराक से तानाशाही का अंत तो हो गया लेकिन आईएस खड़ा हो गया था। ओबामा के पूर्व सहयोगी वली नस्र ने आशंका जताई कि इस जंग के बाद भी कहीं किसी और नाम से कोई अन्य आतंकी संगठन न पैदा हो जाए।
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