प्लूटो पर यान भेजकर अंतरिक्ष विज्ञान में मानव ने एक और बड़ी छलांग लगा दी है। नौ साल की यात्रा के बाद अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का यान ‘न्यू होराइजंस’ मंगलवार शाम भारतीय समयानुसार करीब 6 बजकर 20 मिनट पर प्लूटो के सबसे ज्यादा नजदीक से गुजरा। हालांकि यान से भेजी गई तस्वीरों के लिए अभी बुधवार सुबह तक इंतजार करना पड़ेगा।
साढ़े 9 साल के लंबे सफर के बाद यान प्लूटो के सबसे करीब से गुजरा। प्लूटो की 12,500 किलोमीटर लंबी सतह के ऊपर से यान गुजरेगा। गौरतलब है कि यह यान अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा दूर तक यात्रा करने वाला पहला यान है।
इसने नौ साल से अधिक के अपने सफर में करीब 4.8 अरब किमी की दूरी तय की है। इसे 01 जनवरी 2006 को एटलस वी 551 रॉकेट से लांच किया गया था। इस मिशन की लागत करीब 700 मिलियन डॉलर बताई जा रही है।
पूर्व के अनुमानों से बड़ा निकला प्लूटो
प्लूटो के आकार को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस का अब अंत हो गया है। अमेरिकी एजेंसी नासा के ‘न्यू हराइजंस’ मिशन के मुताबिक प्लूटो का आकार पूर्व के अनुमानों से काफी बड़ा पाया गया।
सूर्य के सबसे दूरस्थ ग्रह प्लूटो का व्यास 2370 किमी मापा गया। प्लूटो की खोज 1930 में की गई थी और तभी से इसके आकार को लेकर बहस चल रही थी। प्लोटो के चरोन, निक्स और हाइड्रा नाम चंद्रमा भी हैं।
2026 में पूरा होगा मिशन
मिशन प्लूटो के बाद यान क्वीपर बेल्ट जाएगा और 2020 तक इससे जुड़ी जानकारियां जुटाएगा। ये मिशन आधिकारिक तौर पर 2026 में पूरा होगा।
क्वीपर बेल्ट ग्रहों से बाहर सोलर सिस्टम ;सौर मंडलद्ध का ही एक हिस्सा है। यह बेल्ट तीन बौने ग्रहों प्लूटो, हौमिया और मेकमेक का घर है। इस पर ग्रहों की ही तरह गोल और बड़े-बड़े पिंड हैं। लेकिन इन्हें ग्रह नहीं माना जाता है।
प्लूटो से छिन गया ग्रह का दर्जा
प्लूटो को सौरमंडल के नौंवे और सबसे छोटे ग्रह का दर्जा हासिल था। इस मिशन के लिए स्पेस क्राफ्ट रवाना होने के कुछ महीने बाद ही नए पिंडों की खोज को मान्यता देने और उन्हें नाम देने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसी इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन ने प्लूटो से ग्रह का दर्जा छीन लिया। अब प्लूटो की पहचान क्वीपर बेल्ट के मलबे के ढेर में मौजूद एक बौने ग्रह की रह गई।