विश्व बैंक ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कारण आई सुस्ती दूर हो चुकी है और यह दोबारा दुनिया की सबसे तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रही है। इस साल इसकी विकास दर 7.3 प्रतिशत और 2019 में 7.5 फीसदी रहेगी।
बैंक की ग्लोबल इकोनामिक्स प्रॉस्पेक्ट रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है और निजी उपभोग में भी मजबूती देखी जा रही है। वर्ष 2016 में नोटबंदी और पिछले साल जीएसटी लागू किए जाने के बाद उसकी विकास दर में लगातार पांच तिमाहियों में गिरावट आई थी, लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार उल्लेखनीय सुधार हो रहा है। मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट और औद्योगिक उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की प्रति व्यक्ति विकास दर में भी बढ़ोतरी हो रही है। आने वाले वर्षों में इससे गरीबी दूर करने और गरीबों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।
साथ में चिंता भी जताई
बैंक ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों और घरेलू मांग में वृद्धि के कारण भारत का आयात बिल बढ़ रहा। इन वजहों से व्यापार और चालू खाता घाटे में बढ़ोतरी हो रही है। यह चिंता की बात है।
आईएमएफ-यूएन के अनुमान बेहतर
भारत के बारे में विश्व बैंक का यह अनुमान इस साल अप्रैल और मई में दो अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से थोड़ा कम है। मई में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने कहा था कि इस साल भारत की विकास दर 7.5 फीसदी और 2019 में 7.6 फीसदी रहेगी। इसके अलावा अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 7.4 और 7.8 फीसदी विकास दर का अनुमान व्यक्त किया था।
वैश्विक अर्थव्यवस्था का बुरा हाल
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर 2017 की तरह 2018 में भी 3.1 फीसदी रहेगी। अगले दो साल में इसमें मामूली गिरावट आने का अनुमान है। 2019 में यह तीन फीसदी और 2020 में 2.9 फीसदी पर पहुंच जाएगी।