भारत का उत्तर और पूर्वी भारत का इलाका दुनिया की उन जगहों में शामिल है, जहां मीठा जल तेजी से कम हो रहा है। इसका कारण जल स्रोतों का ज्यादा इस्तेमाल है। नासा ने अपनी सैटेलाइटों की मदद से किए हालिया अध्ययन में यह दावा किया गया है। नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के वैज्ञानिक मैट रोडेल और उनकी टीम ने इस शोध के लिए मानव क्रियाओं पर आधारित डाटा का इस्तेमाल किया, जिससे पता लगाया जा सके कि पूरी दुनिया में कहां-कहां मीठे जल के स्रोत में बदलाव हो रहा है और क्यों।
जर्नल नेचर में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि बारिश वाले क्षेत्रों में ज्यादा बारिश हो रही है और सूखे स्थानों पर सूखा बढ़ गया है। इसके कारण मानव का खराब जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक चक्र हैं। शोध के लिए अमेरिका-जर्मनी के ग्रेविटी रिकवरी और क्लाइमेट एक्सपेरिमेंट (ग्रेस) अंतरिक्ष यान मिशन की मदद ली गई है। दुनिया के 34 इलाकों का अध्ययन और 14 साल के डाटा का इस्तेमाल किया किया गया है।
30 से ज्यादा क्षेत्रों में कम हो रहा जल
उत्तर और पूर्वी भारत के अलावा मध्य पूर्व, कैलिफोर्निया, ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया की 30 से ज्यादा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां मीठे जल के स्रोत तेजी से कम हो रहे हैं। समस्या गंभीर हो रही है।
सिंचाई में खर्च हो रहा पानी
रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर भारत में गेहूं और धान की फसल की सिंचाई में भूमिगत जल का खूब इस्तेमाल हो रहा है। यही कारण है कि सामान्य बारिश के बावजूद इन इलाकों में पानी के स्रोत कम हो रहे हैं।