अमेरिका एक आधुनिक देश तो है ही साथ ही ये एक बहुत धार्मिक देश भी है। यहां हर साल 5000 नए गिरजाघर बनते हैं और धर्मिक मुद्दे बहुत भावुक होते हैं। गर्भपात यहां एक ऐसा शब्द है जिसके बारे में सार्वजनिक तौर पर विवाद पैदा किए बिना नहीं बोला जा सकता।
इस मुद्दे ने अमेरिकी समाज और राजनीति को कई दशकों से दो खेमों में बांट रखा है। डेमोक्रेटिक पार्टी वाले लगभग सभी राज्य गर्भपात के हक में हैं जबकि रिपब्लिकन पार्टी वाले राज्य इसके खिलाफ हैं। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो या सीनेट के लिए, ये मुद्दा हर चुनाव में अपना सिर ज़रूर उठता है। ये एक बड़ा और हमेशा जिंदा रहने वाला सियासी मुद्दा है।
गर्भपात के खिलाफ
दो दिन पहले हम लोग मेरीलैंड राज्य में थे जहां गर्भपात की इजाजत है। गर्भपात के खिलाफ लड़ने वाले दो सामाजिक कार्यकर्ता ठंड और तेज हवा की परवाह न करते हुए गर्भपात के एक निजी क्लिनिक के सामने पोस्टर और बैनर लिए खड़े थे।
बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद उस इलाके में दिन भर थे। जब वे वहां से लौट रहे थे तब भी पोस्टर और बैनर लिए लोग वहां खड़े थे। ये लोग क्लिनिक बंद करने की मांग कर रहे थे। ज़ुबैर ने उनसे पूछा आपकी बात कोई सुन रहा है? आप एक ऐसे राज्य में गर्भपात के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं जहां ये जायज है।
दोनों ने कहा किसी को गर्भ में जिंदा बच्चे को मारने की इजजात नहीं मिलनी चाहिए। इनका कहना था, ''गर्भपात का क़ानून और प्रशासन से कोई संबंध नहीं है। हमारे धर्म के अनुसार गर्भ में बच्चे की जान लेना हत्या के बराबर है इसलिए हम इस क्लिनिक के बंद करने की मांग कर रहे हैं।''
अमेरिका में गर्भवती महिला गर्भ के 12 सप्ताह पूरे हो जाने से पहले गर्भपात करवा सकती हैं। जो इसका विरोध करते हैं वो कहते हैं की गर्भपात धर्म के खिलाफ है। ऐसे लोगों को प्रो-लाईफ कहते हैं। राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिट रोमनी का संबंध मॉरमॉन चर्च से है जो गर्भपात को हत्या कहता है।
महिला करे फैसला
बराक ओबामा और उनकी पार्टी का तर्क ये है की गर्भपात का फैसला औरत के हाथ में होना चाहिए। ऐसे लोगों को प्रो-चोयाइस कहते हैं। अमेरिका की 1776 में जब स्थापना हुई थी तो उस समय गर्भपात पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था। लेकिन धीरे-धीरे इस पर पाबंदी लगाने की मांग जोर पकड़ने लगी।
कैथोलिक चर्च और रिपब्लिकन पार्टी ने इसमें एक अहम भूमिका निभाई। बीसवीं शताब्दी के शुरू होने के बाद अधिकतर राज्यों ने गर्भपात को ग़ैर-कानूनी करार दे दिया। लेकिन 1950 और 1960 में ये पाया गया कि ग़ैर कानूनी गर्भपातों की संख्या 12 लाख सालाना है।
इसलिए कुछ राज्यों ने इसमें ढील देनी शुरू की और 1973 में गर्भपात को क़ानूनी दर्जा दे दिया गया लेकिन बाद में पहली तिमाही शुरू होने के बाद गर्भपात कराने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अमेरिका में ये एक बहुत संवेदनशील मामला है और इस पर खुल कर अपनी राय देना सिरदर्द मोल लेने जैसा है। हर बार की तरह इस चुनाव में भी ये कई घरेलू मुद्दों में से एक है।