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आखिरकार बच्ची ने कहा, 'अस्पताल नहीं, भगवान के पास ले चलो'

Thu, 16 Jun 2016 05:13 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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- फोटो : dailymail & washingtonpost.com
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उसके नसीब में रूह कंपा देने वाला दर्द था। वो जितने दिन रही जिंदा लाश बनी रही। उसकी उम्र के बच्चों की ख्वाहिशें होती हैं, लेकिन उसकी ख्वाहिश सुन उसकी मां का कलेजा मुंह को आ गया। पांच साल की बच्ची ने कहा अस्पताल मत ले चलो, स्वर्ग जाना ठीक है।
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तस्वीर में दिख रही बच्ची अब इस दुनिया में नहीं है, पांच साल की मासूम 'चारकोट मैरी टूथ डिसीज' से जूझ रही थी। इस बीमारी से ग्रसित लोगों का खुद के शरीर पर जोर नहीं होता। ठीक वैसे ही, बच्ची न खुद से चल पाती थी, न कुछ खा पाती थी और न हीं सांसें ले पाती थी। 

आखिरकार मेडिकल साइंस की वर्षों की तरक्की को धता बताकर वो इस दुनिया से रुख्सत हो गई और अपने पीछे दुनिया भर के डॉक्टरों की फौज को स्तब्ध छोड़ गई। 

डेली मेल की खबर के मुताबिक अमेरिका में हर ढाई हजार लोगों में एक मामला इस बीमारी का मिल जाता है। जूलियाना स्नो भी इसी लाइलाज बीमारी से ग्रसित थी। 

बच्ची की मां मिशेल मून पेशे से न्यूरोलॉजिस्ट हैं, फ्लोरिडा के वाशोंगल स्थित अपने घर में रहती है, बच्ची को बचाने का अथक प्रयास किया, बच्ची के लिए घर को अस्पताल बना डाला, लेकिन नाकाम रहीं।
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'अब मेरी बच्ची मुक्त है, आराम से है'

- फोटो : dailymail
अपनी लाड़ली को खोने के बाद मून ने एक ब्लॉग लिखा, जो ऑनलाइन सेंसेशन बना हुआ है, और सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

वजह है आखिरी वक्त जूलियाना से हुई उनकी बातचीत। उस बातचीत को 43 वर्षीय मून ने शेयर किया है।

मून लिखती हैं कि हमारी प्यारी बच्ची स्वर्ग चली गई। मैं बहुत दुखी और सदमे में हूं। लेकिन आभारी भी हूं कि अब बच्ची मुक्त है, आराम से है। वो कहती हैं कि ईश्वर ने उन्हें इतनी प्यारी बच्ची दी, जिसके साथ उन्होंने करीब 6 साल गुजारे, इसके लिए वो ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।

मून के मुताबिक जब डॉक्टरों ने बताया कि मामूली सर्दी-जुकाम भी जूलियाना की जान ले सकता है और तो उन्होंने नन्हीं जूलियाना से बात की। वो कहती हैं कि मैंने उससे पूछा कि अगर तुम फिर से बीमार पड़ती हो तो तुम अस्पताल जाना चाहोगी या अपने ही घर से सीधे भगवान के पास? तो उसने कह दिया भगवान के पास।
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'आप चिता मत करो, भगवान मेरा ख्याल रखेंगे'

- फोटो : dailymail
आखिरी वक्त जब मून ने जूलियाना से बात की तो कुछ इस प्रकार थी।

मून: तुम फिर से बीमार पड़ती हो तो तुम फिर से अस्पताल जाना चाहोगी या घर पर रुकना चाहोगी?

जूलियाना: अस्पताल नहीं जाऊंगी।

मून: अगर तुम घर पर रुकोगी तो स्वर्ग चली जाओगी?

जूलियाना: हां।

मून: वहां तुम्हारे साथ मम्मी-डैडी नहीं होंगे, तुम्हें अकेले ही जाना होगा?

जूलियाना: आप चिता मत करो, भगवान मेरा ख्याल रखेंगे।

मून: अगर तुम अस्पताल जाती हो, तो तुम्हारे पास ठीक होकर घर वापस आने का मौका रहेगा, तुम ज्यादा वक्त हमारे साथ बिता पाओगी, मैं जानना चाहती हूं कि तुम मेरी बात समझ भी रही हो, अस्पताल जाने पर तुम्हें मम्मी-डैडी के साथ रहने का ज्यादा वक्त मिलेगा?

जूलियाना: मैं समझती हूं।

इतना कहते हुए मून की आंखों से आंसू बह चले।

मून (रोते हुए): आय एम सॉरी, जूलियाना। मुझे पता है कि मेरा रोना तुम्हें पसंद नहीं। मेरी आंखों से आंसू इसलिए बह रहे हैं कि तुम मुझे बहुत याद आओगी।

जूलियाना: कोई बात नहीं, भगवान मेरा ध्यान रखेंगे, वो हमेशा मेरे दिल में हैं।
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