ओरेगॉन के कालेज पर हमला करने वाला बंदूकधारी 13 बंदूकों का मालिक था। गुरूवार सुबह रोजबर्ग में मौजूद कम्युनिटी कॉलेज में हुए हमले में नौ लोगों की मौत हो गई थी।
क्रिस हार्पर मर्सर की पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी।बाद में उसके घर से सात और हथियार बरामद किए गए। गोलीबारी में मारे गए लोगों के नाम पुलिस ने जारी कर दिए हैं। इनमें 18 से 67 साल के लोग शामिल हैं जिनमें सबसे बुजुर्ग व्यक्ति एक शिक्षक हैं।
बचनेवालों की दास्तां
मेडिसिन की छात्रा शरॉन किरखम ने बताया कि उसकी दोस्त किम को तीन गोलियां लगी थीं। वह उनकी बाहों में ही मरी, ''मैं उसे बचा नहीं पाई।" राष्ट्रपति ओबामा ने प्रेस वार्ता में गोलीबारी पर नाराजगी जाहिर करते कहा कि मुल्क में आर्म रिफार्म की जरूरत है।
कहा जाता है कि वहां हथियार बनाने वाली कंपनियां और दूसरे लोगों से मिलकर तैयार नेशनल राइफल एसोसिएशन लॉबी बदलावों का विरोध करती है।
ओबामा ने कहा कि नेशनल राइफल एसोसिएशन प्रभावी तो है लेकिन वह अमेरिकी लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। मर्सर की 2008 में सेना में भर्ती हुई थी लेकिन उन्हें एक महीने से कम में ही हटा दिया गया। हालांकि उसकी वजह ठीक से मालूम नहीं है।
पीड़ितों ने गोलीबारी की वजह धर्म बताया
यह भी पता नही चल पाया कि उसने ओरेगॉन के कम्यूनिटी कॉलेज में गोलीबारी क्यों की। दो पीड़ितों ने गोलीबारी की बड़ी वजह धर्म बताया है - बंदूकधारी ने लोगों से नाम बताने को कहा और ईसाईयों को गोली का निशाना बनाया।
बंदूकधारी ने अपने ऑनलाइन प्रोफाइल में अपनी हॉबी के बारे में लिखा है कि उन्हें उन लोगों को मारना पसंद है जो मुर्दा समान हैं। राजनीतिक झुकाव में उसने खुद को कंजरवेटिव रिपब्लिकन बताया है।
लेकिन उन्होंने खुद को आध्यात्मिक बताया है। उसने अपनी एक पोस्ट में वेस्टर फलागन का हवाला देते हुए लिखा है : आप बहुत से लोगो को मारिए और प्रसिद्ध हो जाइए।