अमेरिकी रक्षामंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा है कि चीन न सिर्फ अपने इलाके में बेहद आक्रामक रवैया अपनाए हुए है बल्कि कुछ मामलों में तो वह हमलावर तक दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि कुछे मामलों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि चीन को अपनी ताकत के इस्तेमाल से भी कोई परहेज नहीं है और इसी के चलते क्षेत्र में कई बाधाएं सामने आ रही हैं।
अमेरिकी रक्षामंत्री ने कहा, सेना को आधुनिक बनाने मे व्यस्त है चीन
अमेरिका के रक्षामंत्री लॉयड ऑस्टिन ने एबीसी न्यूज के साथ एक टॉक शो में कहा कि चीन अपनी सेना को आधुनिक बनाने और क्षमताएं विकसित करने में व्यस्त है। वह अमेरिका से बराबरी करने के चक्कर में उन प्रतिस्पर्धाओं में हमें पछाड़ने की कोशिश कर रहा है, जिनमें हम हमेशा आगे रहे हैं।
उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ चीनी विवादों पर इशारा करते हुए कहा कि चीन के ‘आक्रामक’ और कुछ मामलों में ‘हमलावर’ रुख से कई बार हमारे साझेदारों को भी निशाने पर लिया है। जबकि अमेरिकी साझेदार हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं।
पड़ोसी देशों के साथ मनमानी पर ऑस्टिन ने हाल ही में भारतीय सीमा के पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीन की हथियारबंद सैनिकों की तैनाती की तरफ भी इशारा किया। चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है जबकि यहां वियतनाम, मलयेशिया, फिलीपींस, ब्रुनेई और ताइवान का दावा भी है।
सऊदी से रिश्ते शर्तों के साथ
एक सवाल के जवाब में लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने साफ कर दिया है कि उनका देश सऊदी अरब के साथ अलग तरह के रिश्ते विकसित करेगा। इसका मतलब यह नहीं होगा कि हमारे संबंध अच्छे नहीं रहेंगे। हमें उम्मीद है कि अमेरिका-सऊदी रिश्ते पहले तरह की मजबूत रहेंगे लेकिन कुछ शर्तों के साथ। बता दें, बाइडन प्रशासन ने यमन संघर्ष में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के समर्थन से इनकार किया है।
अमेरिका को चेताया, ताइवान मुद्दे पर वापस ले ‘ट्रंप नीति’
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अमेरिकी बाइडन प्रशासन को चेताया है कि उसे पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ताइवान का समर्थन करने के ‘खतरनाक चलन’ को वापस लेना चाहिए। उन्होंने चीनी संसद की रस्मी सालाना बैठक के दौरान प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि 1949 में मुख्य भूमि से अलग हुए ताइवान पर चीन का दावा ‘न लांघने वाली लाल रेखा’ है।
जबकि अमेरिका के ताइवान से आधिकारिक रिश्ते नहीं रहे हैं। उन्होंने धमकाया कि ताइवान मुद्दे पर चीन के सामने समझौते या रियायत की गुंजाइश नहीं है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पहले ही ताइवान पर हमले की चेतावनी दे चुकी है।