डोनाल्ड ट्रंप-हसन रूहानी (फाइल फोटो)
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अमेरिकी द्वारा बगदाद हवाई अड्डे पर किए गए हवाई हमले में ईरान की कुद्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस बात का भरोसा है कि वह ईरान के साथ 2015 में किए गए परमाणु समझौते पर फिर से बातचीत कर सकते हैं।
व्हाइट हाउस की सलाहकार केलीनेन कॉनवे ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी द्वारा किए गए हवाई हमले में ईरान के वरिष्ठ कमांडर कासिम सुलेमानी को मारे जाने के बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भरोसा है कि वह ईरान के साथ 2015 के परमाणु समझौते पर फिर से बातचीत कर सकते हैं।
ईरान के 2015 में किए गए परमाणु समझौते से पीछे हटने की घोषणा के एक दिन कॉनवे ने ये टिप्पणी की। यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रंप का मानना है कि वह अभी भी ईरान को एक नए परमाणु समझौते पर बातचीत करने के लिए मिल सकते हैं। इस पर कॉनवे ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने कहा कि यह समझौता अभी खुला हुआ है। यदि ईरान एक सामान्य देश की तरह व्यवहार करना शुरू करना चाहता है तो निश्चित रूप से हम इस समझौते पर बातचीत करेंगे।
ट्रंप ने बाद में व्हाइट हाउस के रुख को दोहराया कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा लेकिन ट्रंप ने इसके अलावा कोई अन्य जानकारी नहीं दी। शुक्रवार को अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर बगदाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक हवाई हमले को अंजाम दिया था, जिसमें ईरान के कमांडर कासिम सुलेमानी समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी।
सुलेमानी की हत्या से बौखलाए ईरान ने बदला लेने की कसम खाई है। अमेरिका ने यह भी कहा है कि अगर ईरान अमेरिका को निशाना बनाएगा तो वह ईरान पर भी हमला करेगा। जैसा कि ईरान और अमेरिका के बीच दरार गहरा गई है, तेहरान ने रविवार को घोषणा की कि वह 2015 के परमाणु समझौते के तहत अपने अंतिम दायित्व को छोड़ रहा है। जिसमें सेंट्रीफ्यूज की संख्या को सीमित करना था।
'जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए)' के अनुसार यूरोपीय संघ के साथ ईरान और पी5+1 के बीच एक समझौते पर 2015 में हस्ताक्षर किए गए थे। समझौते के तहत, ईरान ने अपने संवेदनशील परमाणु गतिविधियों को सीमित करने और इसके बदले में अंतरराष्ट्रीय बिरादरी द्वारा आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग की थी।