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एंटनी ब्लिंकन: अफगानिस्तान के बाद अमेरिका का ध्यान दक्षिण चीन सागर में शांति और देश में कोरोना से लड़ने पर

Tue, 20 Apr 2021 02:00 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, वाशिंगटन

सार

  • विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा, अमेरिकी एजेंडे में दूसरे मुद्दे जुड़े
  • अमेरिकी एजेंडे में कुछ खास मुद्दों में चीन से संबंधों को सुधारना भी शामिल है
  • जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 महामारी के रोकथाम की भी सबसे बड़ी जरूरत है
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन - फोटो : Agency
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विस्तार
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अफगानिस्तान में लंबे समय से चली आ रही जंग से अमेरिकी बलों के बाहर होने की घोषणा के बाद अमेरिका का ध्यान दक्षिण चीन सागर पर होगा। यह जानकारी देते हुए विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि अब हम अपना फोकस दक्षिण चीन सागर में शांति और देश में कोरोना वायरस से लड़ने में करेंगे।

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विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा, अमेरिकी एजेंडे में दूसरे मुद्दे जुड़े
ब्लिंकेन ने एबीसी चैनल से हुए बातचीत के दौरान कहा कि समय के साथ अब दूसरी जगहों पर आतंकी खतरा बढ़ गया है। इसलिए अमेरिकी एजेंडे में दूसरे कुछ खास मुद्दे भी जुड़ गए हैं। इनमें चीन से संबंधों को सुधारना भी शामिल है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 महामारी के रोकथाम की भी सबसे बड़ी जरूरत है।

अमेरिकी एजेंडे में ऊर्जा और संसाधनों की उपलब्धता का मुद्दा भी जुड़ गया है। बता दें कि दक्षिण और पूर्वी सागर के कई द्वीपों पर चीन अपना दावा जताते हुए वहां पर बड़ी संख्या में नौसैनिकों को तैनात कर रहा है। जबकि यह रास्ता अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग के लिए मुक्त है। ऐसे में आशंका है कि चीन की ये हरकतें भविष्य में इस मुक्त रास्ते को भी रोक सकती हैं। 
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बंदरगाहों पर ताकत बढ़ा रहा चीन
चीन एक कम्युनिस्ट देश के रूप में दुनिया भर में सुरक्षा, राजनयिक और आर्थिक मामलों के लिए अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। अब उसकी निगाह बंदरगाहों पर है। उसने नौसैन्य मामलों में अमेरिका को भी पीछे छोड़ते हुए हिंद महासागर में म्यांमार, श्रीलंका और पाकिस्तान के बंदरगाहों पर बड़ी हद तक नियंत्रण पा लिया है। चीन ने न सिर्फ यहां नौसैन्य अड्डे खोले हैं बल्कि यहां निवेश भी बढ़ा दिया है।

श्रीलंका की सफाई, कोलंबो बंदरगाह का स्वामित्व चीन के पास नहीं
श्रीलंका अपनी राजधानी कोलंबो में चीनी समर्थन से बंदरगाह बनाना चाहता है। इसे लेकर उठे विवाद के बाद श्रीलंका के न्याय मंत्री अली सब्री ने सफाई दी है कि सरकार के पास 100 फीसदी भूमि है और यह परियोजना विशेष वित्तीय क्षेत्र में निवेश लाने के लिए शुरू की गई है। इसका स्वामित्व चीन के पास नहीं है। बता दें कि श्रीलंका में विपक्ष और लेबर यूनियनों ने सुप्रीम कोर्ट में दर्जनों याचिकाएं डाली हैं।

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