फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lula Da Silva: ब्राजील में लूला की वापसी से बढ़ेंगी अमेरिका की चिंताएं, कूटनीतिक मामलों में भी आएगा फर्क

Thu, 03 Nov 2022 03:43 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रासिलिया

सार

राष्ट्रपति चुनाव के लिए हुए दूसरे चरण के मतदान में वर्कर्स पार्टी के नेता लूला ने मौजूदा राष्ट्रपति बोल्सोलनारो को हरा दिया। लूला अगले एक जनवरी को राष्ट्रपति पद संभालेंगे। उसके साथ ही लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े देश में भी वामपंथी शासन कायम हो जाएगा।
विज्ञापन
लुईस इनासयू लूला द सिल्वा - फोटो : Reuters
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ब्राजील में सत्ता बदलने का असर ना सिर्फ इस देश में, बल्कि पूरी दुनिया में महसूस किया जाएगा। ये राय अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के विशेषज्ञों ने जताई है। उनके मुताबिक ब्राजील लैटिन अमेरिका का सबसे बड़ा देश है, ब्रिक्स में उसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका है, और अक्सर अंतरराष्ट्रीय मामलों में उसका खास योगदान रहा है। इसलिए जायर बोल्सोनारो के हाथ से सत्ता निकलने और लुइज इनेसियो लूला दा सिल्वा के राष्ट्रपति बनने से कूटनीतिक मामलों में बड़ा फर्क महसूस किया जाएगा।

विज्ञापन


बीते रविवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए हुए दूसरे चरण के मतदान में वर्कर्स पार्टी के नेता लूला ने मौजूदा राष्ट्रपति बोल्सोलनारो को हरा दिया। लूला अगले एक जनवरी को राष्ट्रपति पद संभालेंगे। उसके साथ ही लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े देश में भी वामपंथी शासन कायम हो जाएगा। अभी अर्जेंटीना, चिली, मेक्सिको, होंडूरास, पेरू और कोलंबिया के राष्ट्रपति भी वामपंथी नेता हैं।

अमेरिकी जर्नल- एसएआईएस रिव्यू ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स में कूटनीति विशेषज्ञ आंद्रे पैगलियारिनी ने लिखा है कि लूला निश्चित रूप से ब्राजील को एक स्वतंत्र शक्ति के रूप में स्थापित करने की अपनी योजना पर काम करेंगे। वे ब्राजील को ऐसी ताकत बनाना चाहते हैं, जो पश्चिम और पूरब दोनों की शक्तियों से बराबरी के स्तर पर बातचीत कर सके। पैगलियारिनी ने लिखा है- ‘राष्ट्रपति बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रेस में आरंभिक दिनों की सद्भावना का इस्तेमाल लूला विश्व नेताओं और बहुपक्षीय संस्थानों से बेहतर संबंध बनाने में करेंगे।’
विज्ञापन


इसके पहले लूला 2003 से 2010 तक ब्राजील का राष्ट्रपति रह चुके हैँ। उनके तब के कार्यकाल में ब्राजील में आर्थिक खुशहाली आई थी। तब उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का नेतृत्व करने की कोशिश भी थी। इनमें ईरान से जुड़ा परमाणु विवाद भी शामिल है। इराक युद्ध के समय लूला का कई बार अमेरिका से टकराव हुआ था। जबकि उन्होंने लैटिन अमेरिकी देशों के साथ खास व्यापार समझौता किया था, जिससे ब्राजील की कृषि को बहुत लाभ हुआ। तब उन्होंने चीन के साथ करीबी संबंध बनाए थे।

रविवार को चुनाव जीतने के बाद लूला ने कहा कि आज के दौर में वे अमेरिका और चीन के बीच नए शीत युद्ध को अस्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि वे सबके साथ संबंध बनाएंगे। इसे चीन को घेरने की अमेरिकी रणनीति के खिलाफ दिया गया बयान माना गया है। जानकारों ने कहा है कि लूला की विदेश नीति में ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) का महत्त्वपूर्ण रोल रहेगा।

एक अमेरिकी अधिकारी ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा है- ‘ब्राजील की विदेश नीति में अब ब्रिक्स की वापसी हो जाएगी।’ यूक्रेन युद्ध के मामले में लूला की राय अमेरिका के खिलाफ है। कुछ समय पहले अमेरिकी पत्रिका टाइम को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेन्स्की रूस के साथ युद्ध चाहते थे। लैटिन अमेरिका के बारे में भी उन्होंने सख्त राय जताई थी। उन्होंने कहा- ‘अगर अमेरिका लैटिन अमेरिका के स्वतंत्र रहने की इच्छा को नहीं समझता है, तो समस्या खड़ी हो सकती है।’ इसी इंटरव्यू में उन्होंने कहा- ‘चीन के साथ व्यापार हमारे लिए बहुत अहम है। इसलिए चीन के साथ अच्छे रिश्ते ना रखना हमारे लिए असंभव है।’

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें