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अमेरिका में दरिंदगी की हद पार: शवगृह मालिक को 40 साल की सजा, 200 लाशों के साथ किया था अमानवीय व्यवहार

Sat, 07 Feb 2026 07:54 AM IST
लव गौर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलोराडो स्प्रिंग्स (अमेरिका)

सार

अमेरिका के कोलोराडो राज्य में एक अंतिम संस्कार गृह के मालिक को करीब 200 शवों को सड़ने के लिए छोड़ने और परिजनों को नकली अवशेष देने के मामले में अदालत ने 40 साल की जेल की सजा सुनाई है। आरोपी ने चार साल के दौरान शवों के साथ अमानवीय व्यवहार है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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अमेरिका के कोलोराडो में एक दिल दहला देने वाले मामले में अदालत ने फ्यूनरल होम (शवदाह गृह) के मालिक जॉन हॉलफोर्ड को 40 साल की जेल की सजा सुनाई है। हॉलफोर्ड पर करीब 200 शवों के साथ दुर्व्यवहार करने और परिवारों को धोखा देने का आरोप था। अदालत में पीड़ित परिवारों ने उसे 'राक्षस' और 'घिनौना इंसान' करार दिया।
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सजा सुनाने की सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार के सदस्यों ने न्यायाधीश एरिक बेंटली को बताया कि अपने प्रियजनों के साथ हुई घटना के बारे में जानने के बाद से उन्हें भयानक सपने आते रहे हैं। उन्होंने जज से आरोपी जॉन हॉलफोर्ड को अधिकतम 50 साल की सजा देने की अपील की। आरोपी हॉलफोर्ड ने सजा सुनाए जाने से पहले माफी मांगी और कहा कि उसे अपने काम पर जीवन भर पछतावा रहेगा।

पूर्व पत्नी को हो सकती है 35 साल तक की जेल
इस मामले में उसकी पूर्व पत्नी कैरी हॉलफोर्ड, जो रिटर्न टू नेचर फ्यूनरल होम की सह-मालिक थी, उसे 24 अप्रैल को सजा सुनाई जानी है। उसे 25 से 35 साल की जेल हो सकती है। इस जोड़े पर शवों के साथ दुर्व्यवहार करने, चोरी करने, धन की हेराफेरी करने और दस्तावेजों में हेराफेरी करने का आरोप है।  दोनों ने अभियोजकों के साथ एक समझौते के तहत शवों के साथ दुर्व्यवहार के लगभग 200 मामलों में दिसंबर में अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।
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क्या है पूरा मामला?
जॉन हॉलफोर्ड और उसकी पत्नी कैरी हॉलफोर्ड 'रिटर्न टू नेचर' नाम से फ्यूनरल होम चलाते थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने189 शवों को एक इमारत में सड़ने के लिए छोड़ दिया।वहीं परिजनों को उनके प्रियजनों की अस्थियों के नाम पर सूखा कंक्रीट (सीमेंट) थमा दिया। यह सिलसिला 2019 से 2023 तक चलता रहा, जिसका खुलासा तब हुआ जब पड़ोसियों ने बदबू की शिकायत की। हॉलफोर्ड परिवार ने शवों को कोलोराडो स्प्रिंग्स के दक्षिण में स्थित पेनरोस नामक छोटे शहर की एक इमारत में छिपाकर रखा था।

मौज मस्ती और शौक में खर्च की रकम
कई महीनों की मेहनत के बाद उंगलियों के निशान, डीएनए और अन्य तरीकों की मदद से शवों की पहचान की गई। जांच में सामने आया कि हॉलफोर्ड दंपति ने अंतिम संस्कार के नाम पर परिवारों से प्रति व्यक्ति 1200 डॉलर (करीब 1 लाख रुपये) वसूले। इस पैसे का इस्तेमाल शवों के अंतिम संस्कार के बजाय उन्होंने अपनी विलासिता के लिए किया। उन्होंने लक्जरी गाड़ियां खरीदीं। क्रिप्टोकरेंसी और महंगे ब्रांड्स के गहनों पर पैसे खर्च किए। यहां तक कि कोरोना महामारी के दौरान मिलने वाली सरकारी सहायता में भी 9,00,000 डॉलर की धोखाधड़ी की। जॉन हॉलफोर्ड को इस मामले में 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई है, जबकि कैरी हॉलफोर्ड की सजा पर अभी फैसला आना बाकी है।

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कोर्ट में भावुक हुए परिवार
सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार अपने प्रियजनों के साथ हुए अमानवीय व्यवहार को जानकार भावुक नजर आए। एक पीड़ित बेटी केली मैकीन ने कहा, 'मेरी मां के साथ कूढ़ा जैसा व्यवहार किया गया और उन्हें सैकड़ों अन्य लोगों के साथ सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। मेरा दिल टूट गया है।' जांचकर्ताओं के अनुसार जब उन्होंने इमारत की तलाशी ली, तो वहां फर्श पर कीड़े और सड़ते हुए शवों का अंबार लगा था। कुछ शव तो एक-दूसरे के ऊपर रखे हुए थे।
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जॉन हॉलफोर्ड को राज्य और संघीय दोनों मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है। वहीं उसकी पत्नी कैरी हॉलफोर्ड को 24 अप्रैल को सजा सुनाई जाएगी, उन्हें 25 से 35 साल तक की जेल हो सकती है। इस घटना के बाद कोलोराडो सरकार ने अंतिम संस्कार गृहों के लिए अपने नियमों को और सख्त कर दिया है।

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