विदेशी राजयनिकों को जानकारी देते लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों
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अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने 15 देशों के राजनयिकों की जम्मू-कश्मीर यात्रा को महत्वपूर्ण कदम करार देते हुए इंटरनेट पर पाबंदी और नेताओं की हिरासत पर शनिवार को चिंता जाहिर की।
संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जा को केंद्र सरकार ने पिछले साल पांच अगस्त को वापस ले लिया था और प्रदेश को दो केंद्र शाषित क्षेत्रों में बांट दिया था । इसके बाद से कई तरह की पाबंदियां लगाई गई थी ।
पिछले साल पांच अगस्त के बाद पहली बार 15 देशों के राजनयिकों ने पिछले सप्ताह यात्रा की जिसमें अमेरिका के राजदूत भी शामिल थे। यहां उन्होंने कई राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों, नागरिक संस्थाओं के सदस्यों और सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ मुलाकात की। हालांकि इस यात्रा को लेकर सरकार पर आरोप लग रहा है कि यह ‘गाइडेड टूर’ है लेकिन सरकार इससे इनकार कर रही है।
दक्षिण एवं मध्य एशिया की कार्यवाहक सहायक सचिव एलिस जी वेल्स ने शनिवार को उम्मीद जताई कि इस क्षेत्र में स्थिति सामान्य होगी। वेल्स इस सप्ताह दक्षिण एशिया की यात्रा पर आने वाली हैं।
उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि वह भारत में अमेरिकी राजदूत तथा अन्य विदेशी राजनयिकों की जम्मू-कश्मीर यात्रा पर बारीकी से नजर रखी हुई हैं। यह एक महत्वपूर्ण कदम है। हम नेताओं, लोगों को हिरासत में लिए जाने और इंटरनेट पर प्रतिबंध से चिंतित हैं। हमें उम्मीद है कि स्थिति सामान्य होगी। वेल्स 15-18 जनवरी तक नई दिल्ली की यात्रा पर होंगी।