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America: ट्रंप को बड़ी राहत, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उपभोक्ता आयोग से तीन डेमोक्रेट्स को हटाने की दी अनुमति

Thu, 24 Jul 2025 08:08 AM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप को उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा आयोग से तीन डेमोक्रेट सदस्यों को हटाने की अनुमति दी है। इससे पहले एक संघीय अदालत ने इन्हें बहाल किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति को ‘बिना कारण’ आयोग सदस्यों को हटाने का अधिकार है। यह फैसला प्रशासनिक एजेंसियों पर राष्ट्रपति के अधिकार को बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : PTI
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विस्तार
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अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा आयोग (सीपीएससी) से तीन डेमोक्रेट सदस्यों को हटाने की अनुमति दे दी। यह मामला तब सामने आया जब ट्रंप प्रशासन ने इन सदस्यों को हटाया और बाद में एक संघीय अदालत ने उन्हें बहाल कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने राष्ट्रपति को ‘बिना कारण’ आयोग सदस्यों को हटाने का अधिकार दे दिया है।

सीपीएससी एक स्वतंत्र एजेंसी है जो उपभोक्ताओं को असुरक्षित उत्पादों से बचाने का काम करती है। इसमें कुल पांच सदस्य होते हैं, जिनमें से तीन से अधिक एक ही पार्टी से नहीं हो सकते। ट्रंप ने मई में आयोग के तीन डेमोक्रेट सदस्यों को हटा दिया था, जिन्हें राष्ट्रपति जो बाइडन ने नियुक्त किया था। जून में बाल्टीमोर के जिला न्यायाधीश मैथ्यू मैडॉक्स ने ट्रंप की इस कार्रवाई को अवैध बताया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है।
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राष्ट्रपति को ‘बिना कारण’ हटाने का अधिकार
इस मामले में अमेरिका के न्याय विभाग ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि राष्ट्रपति को कार्यपालिका प्रमुख के रूप में एजेंसी सदस्यों को हटाने का पूरा अधिकार है। अदालत के कंजरवेटिव जजों ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि राष्ट्रपति किसी भी आयोग सदस्य को बिना ठोस कारण हटाने के लिए स्वतंत्र है। हालांकि, अदालत के तीन लिबरल जजों ने इससे असहमति जताई।

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1935 के फैसले पर भी उठे सवाल
इस फैसले ने 1935 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ‘हंफ्रीज एग्जीक्यूटर केस’ को फिर से बहस के केंद्र में ला दिया है। उस समय कोर्ट ने कहा था कि स्वतंत्र एजेंसी के सदस्यों को ‘बिना कारण’ हटाया नहीं जा सकता। लेकिन अब यह परंपरा कंजरवेटिव विचारधारा के लिए एक रुकावट मानी जा रही है, जो मानते हैं कि ऐसी एजेंसियों को राष्ट्रपति के अधीन होना चाहिए।
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आयोग की स्वतंत्रता पर खतरा?
सीपीएससी को 1972 में बनाया गया था और इसके ढांचे का उद्देश्य रहा है कि हर राष्ट्रपति को इसका नियंत्रण तो मिले, लेकिन पूरी तरह से उस पर कब्जा न हो। बर्खास्त किए गए डेमोक्रेट सदस्यों के वकीलों ने कोर्ट में कहा था कि इस तरह की बर्खास्तगी आयोग की स्वतंत्रता को कमजोर कर सकती है। वे मानते हैं कि ट्रंप का यह कदम संविधान के संतुलन के खिलाफ है।

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आगे की राह और राजनीतिक असर
इस फैसले के बाद यह तय हो गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पास स्वतंत्र एजेंसियों पर अधिक अधिकार है, जिससे आने वाले समय में अन्य एजेंसियों में भी बदलाव संभव हैं। यह फैसला अमेरिका में प्रशासनिक ढांचे की दिशा बदल सकता है और ट्रंप के लिए कानूनी और राजनीतिक रूप से राहत भरा साबित हो सकता है।


 
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