अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि भारत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र में खुद को अहम सुरक्षा प्रदाता के तौर पर देखता है, जहां वह अपने दोस्त और भागीदार देशों के लिए आर्थिक क्षमताओं के निर्माण और समुद्री सुरक्षा में सुधार में मदद करता है।
24 सितंबर को होने वाले क्वाड शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिका में भारतीय राजदूत ने दिया बयान
उनका यह बयान में अमेरिका में 24 सितंबर को होने वाले क्वाड शिखर सम्मेलन से पहले आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन इसकी मेजबानी करेंगे। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन और जापानी प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा भी शिरकत करेंगे।
‘कार्नेगी इंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस’ कार्यक्रम में संधू ने कहा कि हिंद महासागर अपने करीबी और दूरस्थ पड़ोसियों के लिए पुल है। उन्होंने कहा कि महासागर जो हमें अलग करते हैं, वहीं हमें जोड़ते भी हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत खुद को सुरक्षा प्रदाता के रूप में देखता है। हम पहले थे, जिसने इस क्षेत्र में एचए/डीआर अभियानों में मदद की। चाहे श्रीलंका में बाढ़ आई हो, या मालदीव में पानी की कमी हमने पूरी तत्परता से हमेशा मदद की और वह भी संकट के समय।
उन्होंने कहा कि देश के रूप में आज हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उससे अकेले निपटना काफी कठिन होगा। यह परस्पर निर्भरता, मेरे लिए, कमजोरी का संकेत नहीं बल्कि ताकत का एक स्रोत है। यह दोस्ती है जिसे हम बढ़ा रहे हैं, जो विश्वास हम कायम करते हैं, जो संपर्क हम स्थापित करते हैं, वह उन गंभीर समस्याओं का संभावित समाधान हैं, जिसका सामना आज दुनिया कर रही है।
उन्होंने कहा कि कार्नेगी की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है जब हिंद-प्रशांत शब्द शायद वैश्विक रणनीतिक शब्दावली में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों में से एक बन रहा है। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र के सभी देशों के साथ हमारे संबंध मजबूत हैं और हम आर्थिक क्षमताओं के निर्माण में मदद तथा हमारे मित्रों और भागीदारों के लिए समुद्री सुरक्षा में सुधार कर रहे हैं।