तो आखिर कौन हैं ये
चरपंथी जिनके खिलाफ ट्रंप प्रशासन ने इतनी बड़ी इनामी रकम का एलान किया है :
मौलाना फजुल्लाह
मौलाना फजुल्लाह को साल 2013 में तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान का प्रमुख नियुक्त किया गया था। फजुल्लाह को 16 दिसंबर 2014 को पेशावर के आर्मी स्कूल में हमले का मास्टर माइंड माना जाता है। इस हमले में 131 छात्रों समेत 151 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा फजुल्लाह को जून 2012 में 17 पाकिस्तानी सैनिकों का सिर काटने और नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई पर हमले के लिए भी जिम्मेदार माना जाता है। अमेरिकी सरकार ने इस पाकिस्तानी चरमपंथी पर 50 लाख डॉलर का इनाम रखा है। भारतीय मुद्रा में ये रकम तकरीबन 32 करोड़ रुपये बैठती है।
अब्दुल वली
अब्दुल वली चरमपंथी संगठन जमात उल अहरार (जेयूए) के प्रमुख हैं। जेयूए तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान से अलग हुआ चरमपंथी संगठन है। जेयूए पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सक्रिय है। वली ने पाकिस्तान में कई
आत्मघाती हमलों की जिम्मेदारी ली है। मार्च 2016 में लाहौर में आत्मघाती हमले के पीछे भी अब्दुल वली का ही हाथ माना जाता है। इस हमले में 75 लोगों की मौत हुई थी और 340 अन्य लोग घायल हो गए थे। जेयूए की जड़ें कथित तौर पर पाकिस्तान के पड़ोसी देश अफगानिस्तान में हैं।
मंगल बाघ
अमेरिका ने अपनी इनामी सूची में चरमपंथी संगठन लश्कर ए इस्लाम के प्रमुख मंगल बाघ को शामिल किया है। लश्कर ए इस्लाम भी तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान से अलग हुआ खड़ा है। इसके चरमपंथी मुख्य रूप से अफगानिस्तान में तैनात नैटो के काफिले को निशाना बनाते हैं। सितंबर 2007 में पाकिस्तान की सरकार भी मंगल बाघ पर इनाम की घोषणा कर चुकी है। पाकिस्तान सरकार ने कहा था कि मंगल बाघ के बारे में किसी तरह की सूचना देने वाले और उन्हें गिरफ्तार करने में मदद करने वालों को 60 हजार डॉलर के इनाम की घोषणा की थी।
इसके अलावा अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व देशों के कई संगठनों के चरमपंथियों पर भी
इनाम का एलान किया है। अमेरिकी विभाग का कहना है कि ये चरमपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। अमेरिका ने साफ किया है कि तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान के खिलाफ उसे सख्त रुख इसलिए भी अख्तियार करना पड़ा क्योंकि वो अफगानिस्तान में खुल्लमखुल्ला अमेरिकी फौजों को निशाना बना रहा है। साथ ही अमेरिकी धरती पर भी चरमपंथी हमले करने की कोशिशों में भी जुटा हुआ है।