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यूनियन न बने, इसके लिए अमेजन ने झोंक दी अपनी पूरी ताकत

Thu, 04 Feb 2021 04:19 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

अमेजन कंपनी का अलाबामा स्थित वेयरहाउस मार्च 2020 में बना था। यहां यूनियन बनाने के लिए कर्मचारियों ने अर्जी पिछले नवंबर में दायर की। उस आवेदन पर दो हजार से ज्यादा कर्मचारियों के दस्तखत थे...
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अमेजन - फोटो : pixabay
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विस्तार
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अमेजन कंपनी ने अलाबमा स्थित अपने वेयरहाउस के कर्मचारियों की यूनियन बनाने की कोशिश के खिलाफ जबरदस्त मुहिम छेड़ दी है। यहां के कर्मचारियों ने इस मामले में शुरुआती जीत तब दर्ज की थी, जब उन्हें यूनियन बने या ना बने इस बारे में मतदान कराने की इजाजत संबंधित सरकारी एजेंसी से मिल गई थी। ये मतदान 8 फरवरी को होना है। इसके लिए अलाबामा वेयरहाउस के सभी लगभग 5,800 कर्मचारियों को मतपत्र भेज दिए गए हैं। मतगणना अगले 30 मार्च को होगी। इस बीच अमेजन के अधिकारी डाक मतपत्र से मतदान कराने की मिली इजाजत को कोर्ट में चुनौती देने की कोशिश में जुटे हुए हैँ। उन्होंने ये अपील भी डाली है कि जब तक इस बारे में फैसला नहीं होता, मतदान टाल दिया जाए।

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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मतदान से ठीक पहले अमेजन के अधिकारियों ने कर्मचारियों से संपर्क की मुहिम चला रखी है। इस दौरान वे कर्मचारियों से यूनियन गठन के विरोध में मतदान करने की अपील कर रहे हैं। इस बारे में उन्हें टेस्क्ट मैसेज भेजे गए हैं। साथ ही वेयरहाउस में कर्मचारियों के कुछ समूहों के साथ अधिकारियों ने बैठकें की हैं। डूइटविदाउटड्यूज.कॉम नाम से एक यूनियन विरोधी वेबसाइट भी बनाई गई है। कर्मचारियों को भेजे गए संदेशों में कहा गया है कि कंपनी अपने बारे में बोलने का अधिकार खुद आपको देगी। जबकि यूनियन एक बिजनेस है, जिसके पदाधिकारी बिना कोई काम किए कर्मचारियों से चंदा लेते हैं। खबरों के मुताबिक अमेजन ने फेसबुक पर कई यूनियन विरोधी विज्ञापन दिए हैं, जिनमें कर्मचारियों से यूनियन गठन के खिलाफ वोट डालने का आह्वान किया गया है।

अमेजन कंपनी का अलाबामा स्थित वेयरहाउस मार्च 2020 में बना था। यहां यूनियन बनाने के लिए कर्मचारियों ने अर्जी पिछले नवंबर में दायर की। उस आवेदन पर दो हजार से ज्यादा कर्मचारियों के दस्तखत थे। अगर यहां मतदान का नतीजा यूनियन के पक्ष में आया, तो अमेरिका में अमेजन कंपनी की किसी शाखा में पहली बार यूनियन का गठन होगा। इसका असर सारे देश में होगा। इसके अलावा अमेजन जैसी दूसरी कंपनियों के कर्मचारियों में भी ऐसे पहल के लिए प्रेरित होने की संभावना पैदा होगी। इसीलिए अलाबामा वेयरहाउस में होने वाले मतदान पर सारे देश की, खास कर श्रमिक अधिकार कार्यकर्ताओं की नजर टिकी है।
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अमेजन नए दौर की कंपनियों में सबसे बड़ी कंपनी है। इंटरनेट युग की इन कंपनियों में मैनुफैक्चरिंग दौर की कंपनियों की तरह यूनियन गठन का चलन नहीं है। जबकि अमेजन के कर्मचारियों का आरोप है कि उनमें आपस में संवाद ना रहने के कारण मैनेजर उनसे दुर्व्यवहार करते हैं। एप के जरिए उनके खिलाफ अनुशासन की कार्रवाई कर दी जाती है। बर्खास्तगी तक हो जाती है। जबकि उनके लिए अपील करना और अपना पक्ष रखना मुश्किल बना रहता है। एक मामले में आरोप लगा कि जब एक महिला एरिया मैनेजर ने लैंगिक भेदभाव और यौन उत्पीड़न की शिकायत की, तो उसे बर्खास्त कर दिया गया। ऐसी ही घटनाओं के बाद यूनियन बनाने की मुहिम ने जोर पकड़ा है।

अमेजन उन कंपनियों में है, जिसके मुनाफे में कोरोना महामारी के दौरान भारी इजाफा हुआ है। इसके संस्थापक और सीईओ जेफ बेजॉस की संपत्ति इस दौरान 70 अरब डॉलर बढ़ गई। अब उनकी कुल संपत्ति 185 अरब डॉलर के करीब है। जबकि आरोप है कि उनकी कंपनी के पास कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कार्यस्थलों पर पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। महामारी के दौरान भी ये कर्मचारी बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के काम करते रहे हैं।

अखबार द गार्जियन के मुताबिक अमेजन ने इन आरोपों से संबंधित उसके सवालों पर कोई जवाब नहीं दिया। इस बीच यूनियन बनाने की कोशिश के बारे में अमेजन की प्रवक्ता हीथर नोक्स ने कर्मचारियों को भेजे एक ताजा ई-मेल में कहा है कि कंपनी यूनियन में शामिल होने या ना होने के कर्मचारियों के अधिकार का सम्मान करती है। लेकिन उसे यह नहीं लगता कि जिन लोगों ने ये मांग उठाई है, वे कर्मचारियों के बहुमत की नुमाइंदगी करते हैं। नोक्स ने कहा कि कर्मचारी अमेजन को काम करने के लिए इसलिए चुनते हैं कि उन्हें यहां बेहतर वेतन, लाभ और कार्य स्थितियां मिलती हैं। मगर पर्यवेक्षकों का कहना है कि अमेजन कंपनी के इस दावे में कितना दम है, ये यूनियन के बारे में होने वाले मतदान में कर्मचारियों का क्या फैसला आता है, उससे ही जाहिर होगा।

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