प्रोकोप्चुक रूस के जनरल हैं और उन्होंने कई साल तक रूस के गृह मंत्रालय में काम किया है। जब वे मॉस्को में इंटरपोल के ब्यूरो चीफ थे तब उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने इंटरपोल के अंतरराष्ट्रीय अरेस्ट वॉरंट जिसे इंटरपोल की भाषा में 'रेड नोटिस सिस्टम' कहा जाता है, उसका गलत इस्तेमाल किया था और इसके जरिए उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आलोचकों को निशाना बनाया था।
हालांकि वो इंटरपोल के चार उप प्रमुखों में से एक रहे और उन पर लगा कोई भी आरोप साबित नहीं हो सका। मॉस्को का कहना था कि प्रोकोप्चुक इंटरपोल के उप प्रमुख बने रहेंगे और यूरोप का प्रतिनिधित्व करेंगे।