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चिंताजनक: एआई डाटा सेंटर बना रहे हीट आइलैंड, आसपास पारा पहुंचा 16.4 डिग्री, इस रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Sat, 09 May 2026 05:08 AM IST
राकेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक नए शोध में खुलासा हुआ है कि विशाल एआई डाटा सेंटर अपने आसपास के 10 किलोमीटर के दायरे में 'हीट आइलैंड' बना रहे हैं। शोध के अनुसार, इन सेंटरों के कारण सतह का तापमान औसतन 3.6 डिग्री फारेनहाइट से लेकर अधिकतम 16.4 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ रहा है। रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासे हुए हैं? खबर में जानिए...
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एआई, डाटा सेंटर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को संचालित करने वाले विशाल डाटा सेंटर केवल भारी मात्रा में बिजली ही नहीं खपा रहे हैं, बल्कि वे अपने आसपास के इलाकों को भी तेजी से गर्म कर रहे हैं। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि एआई डाटा सेंटर हीट आइलैंड प्रभाव पैदा कर रहे हैं, जिसके कारण आसपास के क्षेत्रों का तापमान औसतन 3.6 डिग्री फारेनहाइट और कुछ मामलों में 16.4 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ रहा है।
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शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस प्रभाव की चपेट में दुनिया भर में 34 करोड़ से अधिक लोग आ सकते हैं। कैम्ब्रिज विवि के अर्थ ऑब्जर्वेशन समूह के एसोसिएट प्रोफेसर एंड्रिया मारिनोनी और उनकी टीम ने डाटा सेंटरों से निकलने वाली गर्मी के प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। इसके निष्कर्ष गंभीर पर्यावरणीय चिंताओं की ओर संकेत करते हैं। शोधकर्ताओं ने पिछले 20 वर्षों के तापमान आंकड़ों का अध्ययन किया, जिन्हें रिमोट सेंसरों के जरिए एकत्र किया गया था।

इन आंकड़ों की तुलना एआई हाइपरस्केलर डाटा सेंटरों के स्थानों से की गई। हाइपरस्केलर ऐसे विशाल डाटा सेंटर होते हैं जिनमें हजारों सर्वर लगे होते हैं और जिनका आकार 10 लाख वर्ग फुट तक हो सकता है। अध्ययन में 6,000 से अधिक ऐसे डाटा सेंटर शामिल किए गए जो अत्यधिक घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों से दूर स्थित हैं। ऐसा इसलिए किया गया ताकि उद्योगों, घरों की हीटिंग या अन्य शहरी गतिविधियों से पैदा होने वाले ताप प्रभाव को अलग रखा जा सके।
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10 किलोमीटर तक का क्षेत्र प्रभावित
अध्ययन के अनुसार किसी डाटा सेंटर के संचालन शुरू होने के बाद आसपास के क्षेत्रों का सतही तापमान औसतन 3.6 डिग्री फारेनहाइट बढ़ गया। कुछ स्थानों पर यह वृद्धि 16.4 डिग्री फारेनहाइट तक दर्ज की गई। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह पैटर्न दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में समान रूप से दिखाई दिया। उदाहरण के तौर पर मैक्सिको के बाजियो क्षेत्र में दो दशकों में तापमान में लगभग 3.6 डिग्री फारेनहाइट की ऐसी वृद्धि दर्ज की गई जिसे अन्य कारणों से नहीं समझाया जा सका। इसी तरह स्पेन के अरागोन क्षेत्र में, जो यूरोप में हाइपरस्केल एआई डेटा सेंटरों का बड़ा केंद्र है, तापमान में 3.6 डिग्री फारेनहाइट की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि पड़ोसी क्षेत्रों में ऐसा पैटर्न नहीं मिला। तापमान में वृद्धि का असर 10 किलोमीटर तक के क्षेत्रों में देखा गया।

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विशेषज्ञों ने जताई चिंताएं
लंदन साउथ बैंक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेबोरा एंड्रयूज ने कहा कि डाटा सेंटरों के प्रभावों को लेकर पहले से कई चिंताएं मौजूद हैं, लेकिन यह पहला अध्ययन है जो विशेष रूप से उनके द्वारा पैदा की जाने वाली गर्मी पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि एआई उद्योग के तेज विस्तार की होड़ में टिकाऊ और दीर्घकालिक पर्यावरणीय सोच को नजरअंदाज किया जा रहा है। बॉर्डरस्टेप इंस्टीट्यूट फॉर इनोवेशन एंड सस्टेनेबिलिटी के वरिष्ठ शोधकर्ता राल्फ हिंटेमन ने कहा कि अध्ययन गंभीर और चिंताजनक आंकड़े प्रस्तुत करता है, बताए गए प्रभाव काफी अधिक प्रतीत होते हैं। डाटा सेंटरों के लिए बिजली उत्पादन से होने वाला उत्सर्जन गंभीर चिंता का विषय है।
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अभी रास्ता बदलने का समय है
मारिनोनी ने कहा कि यह अध्ययन एआई के पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने पर व्यापक चर्चा शुरू करने में मदद कर सकता है। उनके अनुसार अभी भी ऐसा रास्ता अपनाने की संभावना मौजूद है जिससे एआई की प्रगति और मानवता के लिए उसकी उपयोगिता बनी रहे, लेकिन पर्यावरण पर उसका नकारात्मक प्रभाव कम किया जा सके।




 
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