रिपोर्ट के मुताबिक, एआई कंपनियां दुर्लभ और पुरानी किताबें खरीदकर उन्हें स्कैन करने के बाद नष्ट कर रही हैं। इस पर लेखकों, प्रकाशकों और पुस्तक प्रेमियों ने सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।
किताबें ज्ञान का खजाना होती हैं, और पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों के बुद्धि विवेक को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन अब अपने-अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल को इन्सानों से ज्यादा समझदार बनाने की होड़ में जुटी कंपनियां उन्हें नष्ट करने पर उतर आई हैं। ये कंपनियां बड़ी संख्या में सेकंड हैंड दुर्लभ किताबें खरीदती हैं, उनके जिल्द काटकर स्कैन करती हैं और फिर लुगदी में बदल देती हैं।
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इस सांस्कृतिक बर्बरता की शुरुआत एन्थ्रोपिक ने फरवरी, 2024 में की थी। एआई कंपनियों के इस कदम से दुनियाभर के लेखकों, प्रकाशकों और पुस्तक प्रेमियों में रोष फैलता जा रहा है। ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, एआई का मशीन लर्निंग मॉडल अधिक जानकारियों से भरपूर हो और उन्हें ज्यादा रोचक ढंग से लिख सके, इसके लिए जिन किताबों को नष्ट किया गया उनमें कई 16वीं, 17वीं, 18वीं शताब्दी की हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई कंपनियां डाटा वॉल स्थिति में पहुंच गई है। यानी मॉडल डेवलपर्स के पास अब गुणवत्तापूर्ण डाटा की भारी कमी हो गई है। इसलिए, वे एआई टूल को मजबूत करने में जुटी थीं।
क्या स्कैनिंग के बाद किताबें काटना जरूरी
कैलिफोर्निया की एक कोर्ट ने डिजिटल स्कैनिंग के बाद मूल भौतिक किताब को नष्ट करने को कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं माना था, क्योंकि डिजिटल संस्करण ने भौतिक संस्करण की जगह ले ली थी। इस पेच का फायदा उठाकर कंपनियों को पुरानी किताबें कौड़ियों के भाव खरीदकर नष्ट करने का मौका मिल गया।
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3,000 किताबों के ऑर्डर ने चौंकाया
नीदरलैंड्स के हार्लेम शहर में पुरानी व दुर्लभ किताबों के दुकान चलाने वाले डच व्यवसायी पीटर डी व्रीस को जून के मध्य में अजीबो-गरीब ई-मेल मिला था। उसमें 3,000 शीर्षकों की एक बड़ी सूची संलग्न थी, जिन्हें खरीदने के लिए 2077एआई नामक कंपनी की नताल्या नामक महिला ने संपर्क किया था। बाद में पीटर को पता चला कि यह सिलिकॉन वैली की एआई कंपनियों की थोक में किताबें खरीदकर उन्हें नष्ट करने वाले गुप्त अभियान का हिस्सा था। वह इस करतूत को किताबें जलाने जैसी बर्बरता करार देते हैं।