वैगनर समूह परमाणु हथियारों पर कब्जा करना चाहता था
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रूस के परमाणु भंडार को लेकर यूक्रेन ने बड़ा खुलासा किया है। कहा जा रहा है कि हाल ही में जब 24 जून को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ उसकी निजी सेना ने विद्रोह कर दिया था, उस दौरान वैगनर समूह परमाणु हथियारों पर कब्जा करना चाहता था। हालांकि, पश्चिमी अधिकारियों ने बार-बार इस बात से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि विद्रोह के दौरान रूस का परमाणु भंडार कभी खतरे में नहीं था।
यूक्रेन के सैन्य खुफिया प्रमुख काइरलो बुडानोव ने बताया कि वैगनर लड़ाके परमाणु अड्डे तक पहुंच गए थे और उनका इरादा सोवियत काल के छोटे परमाणु उपकरण हासिल करना था। उन्होंने कहा कि अगर कोई अंतिम व्यक्ति के खड़े होने तक लड़ने के लिए तैयार हैं, तो परमाणु हथियार उन सुविधाओं में से एक है जो दांव को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा देती है।
उन्होंने कहा कि वैगनर समूह के सामने परमाणु भंडारण के पास पहुंचने में एक बाधा बनी वो थे बंद दरवाजे। इसलिए वे तकनीकी क्षेत्र तक नहीं जा सके।
सैन्य संबंधों वाले क्रेमलिन के एक करीबी सूत्र ने बताया कि वैगनर की एक टीम एक ऐसे क्षेत्र में घुसने में कामयाब रही थी, जहां परमाणु हथियार संग्रहीत हैं। ऐसे में अमेरिका घबरा गया था। इसी को लेकर, क्रेमलिन ने रूस को बेलारूसी राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको की मध्यस्थता में वैगनर समूह के साथ जल्दबाजी में बातचीत करने के लिए प्रेरित किया था।
अमेरिका ने क्या कहा?
व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता एडम हॉज ने परमाणु हथियार पर कब्जा करने वाली बात पर कहा कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है। हॉज ने कहा कि हम इस रिपोर्ट की पुष्टि नहीं कर सकते, क्योंकि किसी भी समय परमाणु हथियार को खतरा होने का संकेत नहीं मिला था।
फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स में परमाणु सूचना परियोजना के एक वरिष्ठ अनुसंधान सहयोगी और परियोजना प्रबंधक मैट कोर्डा ने कहा कि रूसी परमाणु सुरक्षा का उल्लंघन करना किसी के लिए भी असंभव होगा।
रूसी सेना भी कर रही प्रिगोझिन का समर्थन
यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव ओलेक्सी डेनिलोव ने कहा कि रूसी सेना में कई लोग वैगनर समूह के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कई कमांडर हैं जो वैगनर के प्रति सहानुभूति रखते हैं और पुतिन का समर्थन नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि कम से कम 14 रूसी जनरलों ने प्रिगोझिन का समर्थन किया है।