जापान में इन दिनों एक 83 वर्षीय व्यक्ति चर्चा में हैं। ये एक कम्युनिस्ट कार्यकर्ता हैं, जो 50 साल तक भूमिगत रहे। यानी पांच दशक बाद ये सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। सामने आते ही उनका आलोचनात्मक तेवर भी सामने आया। उन्होंने देश में कोरोना वायरस महामारी से जिस तरह निपटा गया, उसकी कड़ी आलोचना की है।
ताकियो शिमिजु चाकाकु-हू (मुख्य मध्य गुट) नामक संगठन के प्रमुख थे। वे 1971 में हुए एक दंगे के बाद से छिपे हुए थे। उस अशांति के दौरान एक पुलिस अधिकारी की हत्या कर दी गई थी। इसका आरोप शिमिजु के संगठन पर लगा था। अब सामने आकर शिमिजु ने दावा किया है कि कोरोना महामारी ने ‘क्रांति की परिस्थितियां पैदा कर दी हैं’। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि गुजरे पांच दशक में वह वर्ग परिदृश्य से गायब हो चुका है, जो शिमिजु जैसे नेताओं की बात सुनता था।
शिमिजु ने इस हफ्ते में टोक्यो में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। इसमें उन्होंने दावा किया कि कोरोना महामारी के प्रति सरकार का जो रुख रहा है, उससे देश में मजदूर आंदोलन के लिए अनुकूल स्थितियां पैदा हो गई हैं। शिमिजु की प्रेस कांफ्रेंस को यहां के मीडिया ने ज्यादा तव्वजो नहीं दी। बहुत कम मीडिया घरानों ने अपने पत्रकार वहां भेजे। लेकिन बाद में शिमिजु को बारे में उनकी चर्चा यहां रही है। शिमिजो ने कहा- ‘मैंने मेहनतकश तबकों से कहना चाहता हूं कि क्रांति का वक्त आ गया है।’ लेकिन क्रांति के बारे में उनकी सोच से ज्यादा दिलचस्पी लोगों की यह जानने में थी कि पिछले पांच दशकों में वे कहां छिपे रहे।
इस बारे में पूछे गए सवालों के जवाब शिमिजु ने नहीं दिए। जिस दंगे के बाद वे भूमिगत हुए थे, वह टोक्यो जिले के शिबुया में हुआ था। उसमें कॉकटेल की फेंकी बोतल के लगने से एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई थी। उसके बाद लगभग 2000 लोगों को गिरफ्तार किया गया। यह पूछने पर कि भूमिगत होने के दौरान वे कहां रहे, शिमिजु ने सिर्फ यह कहा कि उस दौरान बहुत से लोगों ने उनकी मदद की।
शिमिजु के संगठन की स्थापना 1957 में हुई थी। तब उसका मकसद दुनिया भर में साम्यवाद को बढ़ावा देना बताया गया था। ऐसा माना जाता है कि पिछले पांच दशक में शिमिजु लगातार सक्रिय रहे और पुलिस को चकमा देते रहे। इस बीच इस संगठन से जुड़े लोग जापान में मौजूद सैनिक अड्डों, अमेरिका-जापान सुरक्षा संधि, टोक्यो में नारिता हवाई अड्डे के निर्माण के खिलाफ और दूसरे सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होते रहे हैं।
चाकुका-हू के सदस्यों पर इस बीच पुलिस के साथ हिंसक झड़पों में भी शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। यह आरोप भी है कि इस गुट ने सरकारी संपत्ति में आगजनी और विस्फोट की कई घटनाओं को अंजाम दिया। इस गुट पर कम से कम 100 लोगों की मौत का जिम्मेदार होने का इल्जाम है। आखिरी बार ये गुट खबरों में 2001 में आया था, जब नारिता हवाई अड्डे पर बम विस्फोट करने का आरोप इस पर लगा था। उस घटना में किसी को चोट नहीं आई थी।
इसके बावजूद शिमिजु के दोबारा सामने आने पर यहां ज्यादा चिंता देखने को नहीं मिली है। टोक्यो स्थित मेइजी इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल अफेयर्स के विश्लेषक जुन ओकुमुरा ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- जिस तरह की सोच पर ये संगठन चलता था, उसे सुनने वाला समूह अब जापान में नहीं है। लेकिन शिमिजु में लोगों की दिलचस्पी है। बहुत से लोग उनसे यह जानना चाहते हैं कि 1960 और 1970 के दशकों के बारे में उनका क्या कहना है, जब उनका संगठन मजबूत था। जहां तक शिमिजु का सवाल है तो अब समय उनसे बहुत आगे निकल गया है, फिर भी उन्होंने क्रांति की उम्मीद नहीं छोड़ी है।