श्रीलंका में बढ़त जन विरोध के बीच राष्ट्रपति गोताबया राजपक्षे की सरकार ने बिजली सप्लाई में की जा रही कटौती को वापस लेने का फैसला किया है। अब ताजा घोषणा के मुताबिक शनिवार से बिजली की कटौती नहीं होगी। आर्थिक संकट में फंसे श्रीलंका में बिजली कटौती लागू करने से लोगों की मुसीबत और बढ़ गई थी। इसका असर उद्योग से कृषि तक पर पड़ रहा था। कई आर्थिक विशेषज्ञों ने इस फैसले की यह कह कर आलोचना की थी राजपक्षे सरकार बिजली सप्लाई में रुकावट डाल कर अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावनाओं को चोट पहुंचा रही है।
उधर सरकार का कहना था कि उसके पास बिजली संयंत्रों को चलाने के लिए पर्याप्त ईंधन नहीं है। इसलिए में मांग के मुताबिक बिजली का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। सरकार ने कहा था कि जरूरत के मुताबिक ईंधन खरीदने के लिए उसके पास पैसा नहीं है। ऐसे में बिजली की आपूर्ति में कटौती करने के अलावा कोई और चारा नहीं है। बिजली आपूर्ति में कटौती का फैसला फरवरी में लागू किया गया था।
श्रीलंका में जितनी बिजली की खपत है, उसका एक तिहाई हिस्से का उत्पादन कच्चे तेल से चलने वाले संयंत्रों से होता है। इतनी ही मात्रा कोयले से संचालित और पनबिजली के संयंत्रों से पैदा होती है। बताया जाता है कि श्रीलंका के पास फिलहाल कोयला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। श्रीलंका सरकार ने बीते सितंबर में 18 लाख टन कोयला खरीदने का टेंडर जारी किया था। उसके तहत दक्षिण अफ्रीका और रूस से उसे कोयले की 38 खेप हासिल हुई हैं। दक्षिण अफ्रीका से चार लाख 80 हजार टन कोयला और आने वाला है।