पोप फ्रांसिस ने अफगानिस्तान में लोकतंत्र लागू करने की बाहरी कोशिश के तौर पर पश्चिमी देशों की संलिप्तता की निंदा की। हालांकि, उन्होंने यह बयान देते समय अनजाने में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का हवाला दिया, जबकि वह जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल का नाम लेना चाह रहे थे। अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद देश में नई राजनीतिक स्थिति के बारे में रेडियो पर प्रसारित साक्षात्कार में पोप ने कहा कि वह जर्मनी की चांसलर मर्केल का जिक्र करते हुए इसका जवाब देंगे।
पोप ने बताया, अपने मूल्यों को दूसरों पर थोपने की गैर जिम्मेदाराना नीति और इतिहास, दूसरे लोगों की परंपराओं को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए अन्य देशों में लोकतंत्र के निर्माण की कोशिशें रोकना आवश्यक है।
पुतिन ने पश्चिमी देशों की थी निंदा
पुतिन ने 20 अगस्त को एक बैठक में अफगानिस्तान को लेकर पश्चिमी देशों की कड़ी निंदा करते हुए कहा था कि तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्जा जमाना मेरी नजर में लोकतंत्र को लागू करने को लेकर पश्चिमी देशों के प्रयासों की निरर्थकता को दिखाता है। इस बीच, मर्केल ने रूस से अफगान नागरिकों पर दबाव बनाने के लिए तालिबान के साथ अपने संपर्कों का इस्तेमाल करने की अपील की थी।