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एक तो आतंकवाद ऊपर से कोरोना, दोहरी मार झेल रहा अफगानिस्तान, बेटियां बनीं 'योद्धा'

Thu, 21 May 2020 02:01 PM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

  • अफगानिस्तान में बेटियां बनीं कोरोना योद्धा
  • कार और बाइक के पुर्जों से बना रहीं वेंटिलेटर
  • अफगानिस्तान में 400 वेंटिलेंटर ही मौजूद
  • कम कीमत में वेंटिलेटर देने का है लक्ष्य
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कोरोना से लड़ाई में आगे आईं देश की बेटियां
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विस्तार
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अफगानिस्तान इस समय दोहरी मार झेल रहा है। एक तो आतंकवाद ऊपर से कोरोना वायरस महामारी के चलते देश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था चरमरा गई है। हालात यह हैं कि अफगानिस्तान में कोरोना मरीजों को वेंटिलेटर तक नसीब नहीं हो रहे हैं। देश में इस समय सिर्फ 400 ही वेंटिलेटर हैं।

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देश के लिए इस परेशानी की घड़ी में बेटियां एक उम्मीद बनकर खड़ी हो गई हैं। ये बेटियां कोरोना पीड़ितों के लिए वेंटिलेटर बना रही हैं। कार के पुर्जों से वेंटिलेटर तैयार करने वाली लड़कियों को लोग 'रोबोटिक्स गर्ल्स गैंग' कहकर बुला रहे हैं।

देश में सिर्फ 400 वेंटिलेंटर ही मौजूद
अफगानिस्तान की आबादी तीन करोड़ 90 लाख है और वहां सिर्फ 400 वेंटिलेंटर ही मौजूद हैं। जो वेंटिलेटर ये लड़कियां बना रही हैं उसे कम कीमत पर हर किसी को उपलब्ध कराया जा सकता है। अफगानिस्तान की लड़कियों के इस समूह को 'अफगान ड्रीमर्स' कहा जाता है। 2017 में अमेरिका ने इन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में विशेष पुरस्कार से नवाजा था। 
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सभी कोरोना योद्धाओं की उम्र 14 से 17 साल के बीच 
समूह में शामिल सभी लड़कियों की उम्र 14 से 17 साल के बीच है। इन लड़कियों का लक्ष्य मई के अंत तक बाजार से काफी कम मूल्य पर  देश को अधिक से अधिक वेंटिलेंटर उपलब्ध कराना है। समूह की एक 17 वर्षीय सदस्य नाहिदी रहीमी का कहना है कि इस समय हमारे लिए एक-एक जिंदगी बचाना बड़ी बात है।

कार और बाइक के पुर्जों से बना रहीं वेंटिलेटर
ये कोरोना योद्धा बेटियां टोयोटा कोरोला ब्रांड की कार का मोटर और होन्डा मोटरसाइकिल की चेन ड्राइव का प्रयोग अपने वेंटिलेटर में कर रही हैं। इनका कहना है कि अच्छे स्तर के वेंटिलेंटर उपलब्ध न होने पर हमारा वेंटिलेटर इमरजेंसी में सांस की तकलीफ से जूझ रहे मरीजों को तुरंत राहत देगा। 

कम कीमत में वेंटिलेटर उपलब्ध कराने का लक्ष्य
समूह की मुख्य सदस्य सोमाया फारुकी ने कहा कि इस टीम की सदस्य होने के नाते मुझे गर्व है। हम जो काम कर रहे हैं वो हमारे हीरो डॉक्टर और नर्स की मदद कर रहा है। इन दिनों मार्केट में वेंटिलेटर की कीमत 22 लाख से 37 लाख रुपये के बीच में हैं, जिसे ज्यादातर गरीब देश नहीं खरीद पा रहे हैं। हमारा लक्ष्य 45 हजार रुपये से भी कम कीमत में वेंटिलेटर उपलब्ध कराना है। 

अफगानिस्तान में अब तक कोरोना वायरस के 7,650 मामले सामने आ चुके हैं और 178 लोगों की मौत हो चुकी हैं। इसकी एक वजह यहां की लचर चिकित्सा व्यवस्था भी है। इस समय अफगानिस्तान के हालात बेहद खराब हैं क्योंकि यह देश ईरान से बेहद करीब है, जो खुद महामारी का केंद्र है। 

मई के अंत तक कर दी जाएगी डिलीवरी
समूह की फाउंडर रोया महबूब खुद भी बिजनेस करती हैं और टाइम मैग्जीन की 100 प्रेरित करने वाले लोगों की लिस्ट में जगह बना चुकी हैं। रोया का कहना है कि मई के अंत तक लोगों की मदद के लिए ये डिलीवर कर दिए जाएंगे। अभी ये 70 फीसदी तैयार हैं। इनमें एयर सेंसर लगना बाकी है। निर्माण का पहला चरण पूरा हो चुका है और दूसरे चरण का काम जारी है।

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