व्यापार और शरणार्थी मुद्दे पर भी चर्चा
अफगान रक्षा मंत्री ने कहा कि समझौते के तहत दोनों देशों के बीच व्यापार फिर से सामान्य होगा। शरणार्थियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा, “हमने अफगान शरणार्थियों की स्थिति पर चर्चा की और इस बात पर जोर दिया कि उनके साथ मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए।"
क्या है डूरंड रेखा?
1893 में ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच बनी यह रेखा हिंदूकुश पर्वत से गुजरती है। इसे ब्रिटिश अधिकारी सर हेनरी मॉर्टिमर ड्यूरंड और अफगान शासक अमीर अब्दुर रहमान के बीच हुए समझौते से तय किया गया था। लगभग 2,670 किलोमीटर लंबी यह रेखा चीन से लेकर ईरान की सीमा तक फैली है।
1947 में पाकिस्तान की आजादी के बाद यह रेखा पाकिस्तान को विरासत में मिली, लेकिन तब से ही अफगानिस्तान इस सीमा को मान्यता नहीं देता है। पश्तून समुदाय ने भी इस रेखा का विरोध किया है।
तुर्किए ने संघर्षविराम का स्वागत किया, कतर की मध्यस्थता की सराहना
तुर्किए ने रविवार (19 अक्तूबर ) को अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्षविराम समझौते का स्वागत किया है। यह समझौता तुर्किए और कतर की मध्यस्थता में दोहा में हुआ। तुर्किए के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में कहा, “हम स्वागत करते हैं कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान ने तुर्किए और कतर की मध्यस्थता में संघर्षविराम पर सहमति जताई है, और दोहा में हुई बातचीत के दौरान दोनों देशों ने शांति और स्थिरता को मजबूत करने के लिए तंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया है।”
मंत्रालय ने आगे कहा, “हम कतर के प्रयासों की सराहना करते हैं, जिसने इन वार्ताओं की मेजबानी भी की।" तुर्किए ने यह भी स्पष्ट किया कि वह दोनों "भाईचारे वाले देशों" के बीच स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों का समर्थन जारी रखेगा।