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अफगानिस्तान से एक्सक्लूसिव: पंजशीर घाटी के लोग बोले- तालिबान झूठ बोल रहा है, हम आजाद हैं

आशीष तिवारी
Updated Tue, 07 Sep 2021 03:26 PM IST

सार

अमर उजाला डॉट कॉम ने की पंजशीर घाटी के लोगों से बातचीत। स्थानीय लोगों ने बताया कि घाटी में तालिबानियों का कब्जा नहीं हुआ। हालांकि, बड़ा युद्ध चल रहा है।
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अफगानिस्तान पंजशीर घाटी: लोगों ने बताई हकीकत - फोटो : अमर उजाला

अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी पर कब्जे को लेकर तालिबान लगातार दावे कर रहा है। तालिबान समर्थकों का कहना है कि वे अब पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर चुके हैं और सरकार गठन की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं। इस बीच अमर उजाला डॉट कॉम ने पंजशीर घाटी के स्थानीय लोगों से बात की तो हकीकत सामने आ गई। उन्होंने साफ-साफ कहा कि तालिबान झूठ बोल रहा है। पंजशीर घाटी पर तालिबानियों का कब्जा नहीं है। उनकी घाटी पहले भी आजाद थी और आज भी आजाद है।

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अफगानिस्तान पंजशीर घाटी: लोगों ने बताई हकीकत - फोटो : अमर उजाला
अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी पर कब्जे को लेकर तालिबान लगातार दावे कर रहा है। तालिबान समर्थकों का कहना है कि वे अब पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर चुके हैं और सरकार गठन की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं। इस बीच अमर उजाला डॉट कॉम ने पंजशीर घाटी के स्थानीय लोगों से बात की तो हकीकत सामने आ गई। उन्होंने साफ-साफ कहा कि तालिबान झूठ बोल रहा है। पंजशीर घाटी पर तालिबानियों का कब्जा नहीं है। उनकी घाटी पहले भी आजाद थी और आज भी आजाद है।

घाटी के लोगों ने कही यह बात

पंजशीर घाटी के लोगों ने कहा कि तालिबानी झूठ बोल रहे हैं। उनका कब्जा पंजशीर घाटी पर नहीं हुआ है, बल्कि हमारे जिन इलाकों को तालिबानियों ने कब्जा कर लिया था, उनको भी हमारे लड़ाकों ने वापस ले लिया है। अब हमारी लड़ाई सिर्फ पंजशीर घाटी में ही नहीं, बल्कि पूरे अफगानिस्तान में शुरू हो चुकी है। पाकिस्तानियों और तालिबानियों से छुटकारा पाने के लिए हमारे नेता की एक आवाज पर पूरे देश में विद्रोह शुरू हो गया है। आप टीवी और सोशल मीडिया पर इसको देख भी सकते हैं। 

'घाटी के आखिरी छोर तक पहुंचना नामुमकिन'

अमरूल्ला सालेह-पंजशीर घाटी - फोटो : Amar Ujala
काबुल में रहने वाले मोहम्मद शमी ने बताया कि उनका परिवार अब भी पंजशीर घाटी में ही है। उनके परिजन अब भी पूरी तरह आजाद हैं और उन पर तालिबानियों का कोई भी शासन नहीं चल रहा है। पंजशीर घाटी में खुद को रजिस्टेंस फोर्स का सक्रिय कार्यकर्ता बताने वाले अशरफ ने अमर उजाला को बताया कि तालिबानी झूठ बोल रहे हैं। तालिबानियों ने अब तक जिन इलाकों पर कब्जा किया था, हमारी फोर्स के लड़ाकों ने सब वापस ले लिया है। घाटी के आखिरी छोर तक आने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है, जहां पर रजिस्टेंस फोर्स के लोगों ने माइंस बिछा रखी हैं। इसके अलावा हमारी तोप और टैंक उसी रास्ते पर तैनात हैं। मोहम्मद शमी ने कहा कि आपको हमारी घाटी की भौगोलिक स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है। घाटी के आखिरी छोर तक आने के लिए जिस रास्ते का इस्तेमाल किया जाता है, उसमें एक तरफ पहाड़ी है और दूसरी तरफ हजारों फीट गहरी खाई है। 

'किसी भी हमले को नेस्तनाबूद कर देंगे हमारे लड़ाके'

मोहम्मद शमी ने अपने साथ मौजूद पंजशीर घाटी के रुखा जिले के तालिब बेग से बात कराई। तालिब ने बताया कि घाटी पर कब्जे के लिए हवाई मार्ग का ही इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन हमारे लड़ाके ऐसे किसी भी हमले को नेस्तनाबूद करने के लिए मुस्तैद हैं। ऐसे में तालिबानी हवाई मार्ग का इस्तेमाल भी नहीं कर सकते हैं। पाकिस्तान की मदद से तालिबानियों ने हमारे ऊपर हमले जरूर किए। हालात अभी बहुत कठिन हैं, लेकिन हम यह जंग जीत लेंगे।  

कमांडर हसीब भी सही सलामत

तालिबानियों के पंजशीर घाटी पर कब्जे के दावे को नेशनल रजिस्टेंस फोर्स भी पूरी तरीके से खारिज कर रही है। फोर्स के मुताबिक, तालिबानियों ने दावा किया था कि उनके कमांडर हसीब को मार दिया गया, लेकिन फोर्स ने हसीब की तस्वीर के साथ एक पोस्ट किया। इसमें हसीब की ओर से लिखा है कि कमांडर हसीब जिंदा है, लेकिन युद्ध चरम पर है। उनके कमांडर और सैनिक बीते कई रोज से सोए भी नहीं। खाना भी नहीं खाया है। फोर्स ने बकायदा तालिबानी सैनिकों का एक ऑडियो जारी कर इस बात की तस्दीक की कि तालिबानी पंजशीर घाटी में कब्जा नहीं कर पा रहे हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक तालिबानी सैनिक की बातचीत बताती है कि उनके लड़ाकों को तकरीबन तीन सौ पंजशीरी आंदोलनकारियों ने बंदी बना लिया है। 

तालिबानियों पर बीती रात हुआ हवाई हमला

पूरी दुनिया में इस बात को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है कि क्या वास्तव में तालिबानियों ने पंजशीर घाटी पर कब्जा कर लिया है या नहीं। इसी बीच पंजशीर घाटी में अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहे नॉर्दर्न रजिस्टेंस फोर्स से जुड़े लोगों ने दावा किया कि बीती रात अफगानिस्तान एयरफोर्स के जहाजों ने घाटी के बाहरी छोर पर मौजूद तालिबानियों के कैंप पर गोले बरसाए। हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि ये जहाज अफगानिस्तान एयरपोर्ट के नहीं थे। हालांकि, अफगानिस्तान के उत्तरी छोर पर बसी आंद्रब घाटी के कई गांवों में रहने वालों को इस हमले के बारे में सूचना दी गई थी। लोगों का कहना है कि जिन तीन जेट विमानों ने तालिबानियों के कैंप पर हमला किया, वे पहले तजाकिस्तान गए और वहां से फिर वापस आए।

'विरोध में महिलाएं ज्यादा मुखर'

अफगानिस्तान के स्वतंत्र पत्रकार हातिक मलिकजादा ने बताया कि अहमद मसूद के कहने पर ही पूरे देश में पाकिस्तान और तालिबानियों के खिलाफ विद्रोह पैदा हो गया। यही वजह है कि बीते 24 घंटे में काबुल से लेकर प्रवान तक और डाइकुंदी से लेकर बल्ख में नेशनल अप्राइसिंग की बात होने लगी। जनता सड़कों पर है। खासतौर से महिलाएं तो विरोध में बहुत ही मुखर हो चुकी हैं। वो कहते हैं कि अहमद मसूद की एक आवाज पर जनता तालिबानियों के विद्रोह में उतर आई है। मंगलवार (छह सितंबर) की सुबह से ही काबुल में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन होने लगा। उन्होंने बताया कि अब यह लड़ाई सिर्फ पंजशीर को बचाने की नहीं, बल्कि पूरे अफगानिस्तान को तालिबान और पाकिस्तानियों के चंगुल से आजाद कराने की हो चुकी है। इससे पहले अहमद मसूद ने एक पत्र जारी करके एलान किया था कि बहुत जल्द ही अफगानिस्तान को तालिबान और पाकिस्तान के चंगुल से आजाद करा लेंगे। 
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