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कोरोना में कारगर हो सकती है एक्यूपंक्चर तकनीक, मौतों को किया जा सकता है कम

Wed, 19 Aug 2020 05:49 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
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एक्यूपंक्चर - फोटो : pixabay
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अब वैज्ञानिकों का दावा है कि एक्यूपंक्चर से कोरोना संक्रमण से होने वाली मौतों को काबू किया जा सकता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने चूहे पर हुए अध्ययन के बाद आए नतीजे के आधार पर यह दावा किया है। बैक्टीरियल इंफेक्शन से पीड़ित चूहों पर इलेक्ट्रोएक्यूपंक्चर तकनीक का प्रयोग किया तो पता चला कि तीन तरह के होने वाले साइटोकाइन स्टॉर्म का स्तर बहुत कम था। कोरोना मरीजों में साइटोकाइन स्टॉर्म के चलते शरीर की इम्यूनिटी शरीर के खिलाफ ही काम करने लगती है। इससे सूजन बढ़ती है और मरीजों की मौत भी हो रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पूरक चिकित्सा के रूप में इसका इस्तेमाल हो सकता है।

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मौतों को किया जा सकता है कम
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के न्यूरोबायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. किफु मा का अध्ययन हाल में न्यूरॉन जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें दावा है कि एक्यूपंक्चर की मदद से सूजन की तकलीफ को कम किया जा सकता है। सेप्सिस से होने वाली कोरोना मरीजों की मौतों को कम किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने शरीर के तीन स्थान भी तय किए हैं लेकिन वे शोध को और पुख्ता करना चाहते हैं।

इस तरह का असर दिखा...
वैज्ञानिकों ने छोटी सी इलेक्ट्रोड की सुई चूहों के पैरों के पास लगाई। करंट छोड़ा। वेगस नर्व सक्रिय हुई तो डोपामाइन रिलीज होने लगा जो एंटी इन्फलैमेट्री न्यूरोट्रांसमीटर है। जिन चूहों का इलाज इस पद्धति से हुआ उनके रक्त में साइटोकाइन स्टॉर्म का स्तर कम था। एक्यूपंक्चर से जिन 60% चूहों का इलाज हुआ वो ठीक हो गए। जिनका इलाज ऐसे नहीं हुआ उनमें से केवल 20% ही बच पाए।

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