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सिंधी-अमेरिकी कार्यकर्ता ने कहा- धार्मिक उत्पीड़न बन गया है पाकिस्तान की प्रवृत्ति

Wed, 23 Oct 2019 02:18 PM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
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सिंधी अमेरिकी कार्यकर्ता फातिमा गुल - फोटो : ANI
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धर्म के नाम पर उत्पीड़न और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध पाकिस्तान की प्रवृत्ति बन गया है। यह कहना है सिंधी अमेरिकी मानवाधिकार कार्यकर्ता फातिमा गुल का। उन्होंने वाशिंगटन में मंगलवार को दक्षिण एशिया में मानवाधिकारों की स्थिति पर संसद की सुनवाई के दौरान कहा कि पाकिस्तान में हिंदू, ईसाई और अहमदिया जैसे अल्पसंख्यक समुदाय धार्मिक कट्टरपंथियों के हाथों उत्पीड़न झेलने पर मजबूर हैं। 

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गुल ने अमेरिकी सांसदों को बताया कि कट्टरपंथी बेरोक-टोक उत्पीड़न कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देशों में से एक है। गुल ने कांग्रेस की उपसमिति को बताया, '1990 से, ईशनिंदा के नाम पर 70 लोगों की हत्या की गई और 40 लोग अभी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं और फांसी की सजा काट चुके हैं। धार्मिक उत्पीड़न पाकिस्तान की मूक विशेषता बन गया है। हिंदू, ईसाई, अहमदिया और हजारा उन धार्मिक कट्टरपंथियों के निशाने पर आने वाले असहाय लोग हैं जो सरकार की बिना रोक-टोक के काम करते हैं।'

उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान को मुख्य तौर पर पाकिस्तानी सेना और इस्लामी चरमपंथी समूह चलाते हैं। अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक हर रोज सरकारी अधिकारियों एवं उनके समर्थकों के हाथों दमन, हिंसा और धार्मिक एवं राजनीतिक उत्पीड़न सहते हैं।' अहमदिया, शिया, बलोच को लगातार धार्मिक कट्टरपंथी का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान महिलाओं पर होने वाले अत्याचार और दुष्कर्म के मामलों में सबसे खतरनाक देशों की सूची में छठवें स्थान पर है।
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मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि अमेरिका की तरफ से पाकिस्तान सरकार को प्रत्यक्ष तौर पर मिल रही आर्थिक सहायता के साथ पाकिस्तानी अधिकारी देश भर के नागरिकों पर अपना शिकंजा लगातार कसते जा रहे हैं। गुल ने कहा कि पाकिस्तान एकमात्र ऐसा देश है जो अपने ही नागरिकों के खिलाफ कानून बनाता है। मानवाधिकार रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में बच्चों के साथ होने वाला शोषण चिंताजनक है। अकेले पंजाब प्रांत में 141 ममाले दर्ज किए गए हैं।

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