पाकिस्तान में हाल में तैयार की गई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में शामिल एक पहलू को लेकर यहां कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। नीति दस्तावेज में शामिल मुख्य बिंदुओं को शुक्रवार को सार्वजनिक किया जाएगा। लेकिन उसके पहले अधिकारियों ने इसके बारे में पाकिस्तानी अखबारों को जानकारी दी। अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक नीति दस्तावेज में कहा गया है कि निकट पड़ोसियों के सात शांति कायम करना और आर्थिक कूटनीति पाकिस्तान की विदेश नीति का केंद्रीय बिंदु होगा। इसी सिलसिले में भारत का जिक्र आया है।
दस्तावेज के मुताबिक ‘कश्मीर विवाद’ का अंतिम समाधान निकले बिना भी पाकिस्तान भारत के साथ व्यापार का दरवाजे खुला रखना चाहता है। लेकिन यह शर्त इसमें जरूर शामिल की गई है कि दोनों देशों के बीच बातचीत हो और उसमें प्रगति हो। एक अधिकारी ने द एक्सप्रेस ट्रिब्यून से कहा- ‘हम भारत के साथ अगले 100 साल तक विरोध भाव कायम रखने की कोशिश में नहीं हैं। नई नीति निकट पड़ोसी देशों के साथ शांति की तलाश करने की है। अगर बातचीत में प्रगति हो, तो भारत के साथ व्यापार और कारोबारी रिश्तों को आगे बढ़ाना संभव है।’
मीडिया ब्रीफिंग में पाकिस्तान के अधिकारियों ने इसी सोच की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि इस मकसद के अनुरूप अब आर्थिक कूटनीति और निकट पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण संबंध पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। लेकिन ज्यादातर विश्लेषकों को उम्मीद नहीं है कि नीति दस्तावेज में ऐसी बातें लिख देने का मतलब पाकिस्तान के नजरिए में बुनियादी बदलाव आना है। इन विश्लेषकों के मुताबिक निकट भविष्य में भारत से पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार की कोई संभावना नहीं है।