फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूक्रेन संकट: चीन और रूस को लगता है कि अब आ गया है उनका समय

Tue, 15 Feb 2022 06:32 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

विश्लेषकों ने कहा है कि चीन के खिलाफ सख्त रुख के बावजूद अमेरिका बीजिंग में विंटर ओलिंपिक खेलों के सफल आयोजन में कोई रुकावट नहीं डाल पाया। उधर यूक्रेन मामले में रूस को बार-बार धमकाने के अलावा अमेरिका कोई ऐसा कदम नहीं उठा पाया है, जिससे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चिंता बढ़ाई जा सके। इस बीच रूस और चीन ने अपने संबंध और गहरे बना लिए हैं...
विज्ञापन
चीन-रूस - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

क्या रूस के आगे अमेरिका लाचार हो गया है? ये चर्चा अब अमेरिकी मीडिया में भी शुरू हो गई है। इनमें विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि यूक्रेन के मुद्दे पर तमाम सख्त रुख दिखाने के बावजूद जो बाइडन प्रशासन कोई प्रभावी कदम उठाने में सक्षम नहीं दिख रहा है। इन विश्लेषणों के मुताबिक रूस और चीन ने मिल कर अमेरिकी वर्चस्व को रोकने में काफी हद तक कामयाबी पा ली है।

विज्ञापन


विश्लेषकों ने कहा है कि चीन के खिलाफ सख्त रुख के बावजूद अमेरिका बीजिंग में विंटर ओलिंपिक खेलों के सफल आयोजन में कोई रुकावट नहीं डाल पाया। उधर यूक्रेन मामले में रूस को बार-बार धमकाने के अलावा अमेरिका कोई ऐसा कदम नहीं उठा पाया है, जिससे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चिंता बढ़ाई जा सके। इस बीच रूस और चीन ने अपने संबंध और गहरे बना लिए हैं। अब वे मिल कर नई विश्व व्यवस्था कायम करने के दावे कर रहे हैं।

पूरब का उदय, पश्चिम ढलान पर

लंदन स्थित एसओएएस यूनिवर्सिटी में स्थित चाइना इंस्टीट्यूट के निदेशक स्टीव त्सांग ने अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी से कहा- ‘ये दोनों देश डोनाल्ड ट्रंप के बाद का दौर देख रहे हैं, जब अमेरिका को अफरातफरी में अफगानिस्तान से लौटना पड़ा। उनकी राय है कि अमेरिका रूस को नहीं रोक पाया है। वह कोविड-19 महामारी को भी नहीं संभाल पाया है। इसके बीच उनका यह कहना गलत नहीं है कि अब पूरब का उदय हो रहा है, जबकि पश्चिम ढलान पर है।’

विशेषज्ञों के मुताबिक कई विश्व मंचों से अमेरिका के हट जाने से रूस और चीन का हौसला बढ़ा है। अमेरिकी लोकतंत्र को लेकर गहरा रहे सवालों से भी उनका मनोबल बढ़ा है। चीन और रूस का आकलन है कि इन परिस्थितियों के कारण अब दुनिया में एक खालीपन पैदा हो गया है, जिसे वे भर सकने की स्थिति में हैं। बीत चार फरवरी को अपनी बातचीत के बाद बीजिंग में पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जो साझा बयान जारी किया, उसमें इसी सोच की झलक मिली।

विज्ञापन


साझा बयान में कहा गया- दुनिया में शक्तियों के पुनर्वितरण का रुझान उभरा है। अब नए युग में शांति, स्थिरता, और टिकाऊ विकास को सुनिश्चित किया जा सकेगा। अब दुनिया में अमेरिका की ताकत की राजनीति और कमजोर देशों को डराने-धमकाने की प्रवृत्तियों के लिए जगह नहीं रहेगी।

चीन-रूस की दोस्ती फायदे में

एनबीसी के विश्लेषक एलेक्जेंडर स्मिथ ने लिखा है कि चीन और रूस की गहरा रही निकटता दोनों देशों के फायदे में है। इसका नतीजा यह होगा कि चीन शिनजियांग प्रांत में उइघुर मुस्लिम अल्पसंख्यकों के कथित दमन, हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों पर कार्रवाई, और ताइवान के मामले में अपने दावे को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना का मुकाबला करने की बेहतर स्थिति में होगा। उधर रूस नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार को रोकने की अपनी मंशा पूरी कर पाएगा।

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स में चीन के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ किंग्सले एडनी के मुताबिक चीन में दशकों से अमेरिका के ढलान पर होने की चर्चा होती रही है। अब साझा बयान में इस बात को इतने साफ ढंग से कहने का मतलब है कि चीन में ये चर्चा एक ठोस निष्कर्ष पर पहुंच गई है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें