गर्भपात के खिलाफ अल सल्वाडोर में कठोर कानून हैं। हाल ही में देश की एक अदालत ने गर्भपात को मानव वध या हत्या मानते हुए एक महिला को कठोर सजा सुनाई है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में गर्भपात के नियमों में बदलाव के खिलाफ बहस व प्रदर्शन जारी हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अल सल्वाडोर की एस्मे नाम की महिला को 30 साल की सजा दी गई है। यह महिला केस के विचाराधीन रहने के दौरान दो साल जेल में रह चुकी है। उसे उच्च अदालत से राहत नहीं मिली तो 28 साल और जेल में रहना होगा।
दोषी करार दी गई अल सल्वाडोर की महिला को उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वह गर्भपात के बाद चेकअप के लिए अस्पताल आई थी। उसे दी गई 30 साल की सजा पर दुनिया भर में चर्चा चल रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ता भी इसका विरोध कर रहे हैं। वे इसे दुनिया को पीछे ले जाना वाला बता रहे हैं। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स लॉयर पॉला अविला-गुएलेन ने कहा कि एस्मे को इस तरह की सजा दिया जाना दुखद है।
इस फैसले का असर अमेरिका पर भी पड़ सकता है। अमेरिका में प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि महिलाओं को गर्भपात की अनुमति मिलनी चाहिए और इसे कानूनी अपराध नहीं माना जाना चाहिए। महिलाओं की मांग है कि गर्भपात की कानूनी इजाजत मिलना चाहिए।
अमेरिका में चल रही गर्भपात को प्रतिबंधित करने की तैयारी
दरअसल, अमेरिका में 50 साल पुराने गर्भपात कानून को बदलकर इसे प्रतिबंधित करने की तैयारी चल रही है। गत दिनों अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में गर्भपात के नए कानून का मसौदा जारी किया था। इसके बाद अमेरिका के कई शहरों में प्रदर्शन शुरू हो गए थे। इस फैसले को अमेरिकी महिलाओं की आजादी छीनने वाला बताया जा रहा है।