सोशल मीडिया पर हिट होने के लिए अक्सर रचनात्मकता को तवज्जो दी जाती रही है। पर कुछ लोगों ने घृणा और उन्माद भरे कंटेंट को ही सफलता का फार्मूला बना लिया। यूरोप समेत कुछ पश्चिम देशों में तो इन्होंने मुस्लिम और अश्वेत विरोध की झूठी कहानियां गढ़ कर बीते 2 साल में लाखों-करोड़ों व्यूज हासिल कर लिए। हालांकि अपनी गलती का एहसास होने पर अब ऐसे ही एक यूट्यूबर रॉबर्टसन ने दुनिया के सामने आकर अपने हिट होने के फार्मूले का खुलासा किया है।
सच्चाई थी बिल्कुल उलट
रॉबर्टसन के वीडियो ने यूरोप भर में प्रवासियों के खिलाफ विरोध पैदा किया। इस घटना के बारे में हर तरफ चर्चा होने लगी। जबकि इसमें वास्तविक घटना को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया था। लोगों में गलत धारणा बनाने के लिए इसे संपादित किया गया था। पूरा वीडियो देखा तो पता चला कि असल में रॉबर्टसन ही उस अफ्रीकी व्यक्ति के खिलाफ आक्रामक थे।
बनावटी वीडियो को 30 लाख व्यूज, बटोरी सुर्खियां
2018 में ब्रिटेन के दक्षिणपंथी कार्यकर्ता टॉमी रॉबर्टसन यूट्यूब पर वीडियो साझा कर दावा किया कि रोम में उन पर अफ्रीकी प्रवासी ने हमला कर दिया। इसे करीब 30 लाख लोगों ने देखा। ब्रिटेन के कई अखबारों में इस घटना ने सुर्खियां बटोरी। घटना को कैमरे में कैद करने वाले यूट्यूबर कोलान रॉबर्टसन के मुताबिक वह टकराव बनावटी था।
नाटकीय दृश्यों पर रहा जोर
हाल ही में एक साक्षात्कार में 25 वर्षीय रॉबर्टसन ने कहा, 2 साल से भी ज्यादा वक्त तक हमने चालाकी से संपादन कर टकराव भरे जो भी वीडियो सोशल मीडिया पर डाले उन्हें करोड़ों व्यूज मिले। यही वजह है कि हमने ज्यादा से ज्यादा उग्र वीडियो बनाकर पोस्ट किए। हम सबसे ज्यादा नाटकीय दृश्यों पर जोर देते थे। भले ही वह बनावटी या फर्जी हों। उन्होंने स्वीकारा, हमने यूट्यूब पर भविष्य बनाने के लिए टकराव का रास्ता चुना था।
बदला मन: सच्चाई से वास्ता हुआ तो छोड़ा रास्ता
लोकप्रियता हासिल कर रहे रॉबर्टसन को जल्द ही सच्चाई का एहसास हो गया कि उनके वीडियो लोगों के बीच खतरनाक घृणा पैदा कर रहे हैं। इसके चलते उनका ह्रदय परिवर्तन हुआ और इस रास्ते को छोड़ने का फैसला कर लिया। अब दुनिया के सामने उन तरीकों के बारे में बता रहे हैं जिनके बूते उन्होंने अपने साथियों के साथ सफलता हासिल की थी।
ऑरलैंडो में आतंकी घटना ने उकसाया
रॉबर्टसन के मुताबिक, 2016 में अमेरिका के ऑरलैंडो में एक नाइटक्लब में इस्लामिक स्टेट का नाम लेकर सिरफिरे द्वारा 49 लोगों को मारने की घटना ने उन्हें मुस्लिम और प्रवासियों के विरोध से भर दिया था।
ऐसे वीडियो बार-बार देखकर लोग कट्टरपंथी बन सकते हैं। यही वजह है कि दुनिया भर में टेक कंपनियां और नियामक यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की अथाह शक्ति को नियंत्रित करने के लिए संघर्षरत हैं।
- गिलोम शेस्लॉट, पूर्व यूट्यूब इंजीनियर