फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bangladesh Crisis: आईएमएफ दल की यात्रा से संकटग्रस्त बांग्लादेश को ऊंची उम्मीदें

Thu, 27 Oct 2022 05:32 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

Bangladesh Crisis: हाल में विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से गिरावट आने के बाद बांग्लादेश आईएमएफ से जल्द कर्ज पाने के लिए बेसब्र हो गया है। 19 अक्तूबर को खत्म हुए सप्ताह में बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार में 35.98 बिलियन डॉलर ही बचे थे। 28 महीनों में यह न्यूनतम स्तर है...
विज्ञापन
Bangladesh- Prime minister Sheikh Hasina - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बांग्लादेश में विदेशी मुद्रा के बढ़ते संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का एक दल यहां पहुंचा है। इस दल ने यहां बांग्लादेश की कर्ज देने की गुजारिश पर बातचीत शुरू की है। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि मौजूदा कर्ज और विदेशी मुद्रा संकट के बीच बांग्लादेश दक्षिण एशिया में तीसरा देश बना है, जिसने आईएमएफ से कर्ज मांगा है। इसके पहले श्रीलंका और पाकिस्तान इस अंतरराष्ट्रीय संस्था की पनाह में जा चुके हैं।

बुधवार को यहां पहुंचने के बाद आईएमएफ के दल ने कहा- ‘हमारी यात्रा का मकसद कर्ज की गुजारिश पर कर्मचारी स्तर (स्टाफ लेवल) की सहमति बनाने की दिशा में बढ़ना है।’ बांग्लादेश ने आईएमएफ से 4.5 बिलियन डॉलर का कर्ज मांगा है। आईएमएफ के दल के साथ बातचीत में बांग्लादेश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बांग्लादेश बैंक के गवर्नर अब्दुर रऊफ तालुकदार कर रहे हैं। तालुकदार ही वाशिंगटन में आईएएफ की हुई वार्षिक बैठक के दौरान अपने देश का प्रतिनिधिमंडल लेकर गए थे।

हाल में विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से गिरावट आने के बाद बांग्लादेश आईएमएफ से जल्द कर्ज पाने के लिए बेसब्र हो गया है। 19 अक्तूबर को खत्म हुए सप्ताह में बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार में 35.98 बिलियन डॉलर ही बचे थे। 28 महीनों में यह न्यूनतम स्तर है। बांग्लादेश में सबसे ज्यादा चिंता निर्यात से होने वाली आमदनी में गिरावट से पैदा हुई है। साथ ही विदेश में रहने वाले बांग्लादेशी भी अब पहले से कम रकम अपने देश भेज रहे हैं। इस बीच देश का आयात बिल बढ़ता चला जा रहा है।

हालांकि अभी बांग्लादेश के पास पांच महीनों के आयात का बिल चुकाने लायक विदशी मुद्रा है, लेकिन नवंबर में बड़ी देनदारियां हैं। उससे विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट आने की आशंका है। प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद के ऊर्जा सलाहकार तौफिक-ए-इलाही चौधरी रविवार को कहा था कि अब देश के पास बिजली उत्पादन के मकसद से तेल आयात करने के लिए पैसा नहीं बचा है। इस कारण देश भर में बिजली की कटौती करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा- ‘ये सारी समस्या विदेशी मुद्रा से जुड़ी हुई है।’

इस साल बांग्लादेश पर विदेशी कर्ज का बोझ भी बढ़ा है। जून के आखिर तक देश का विदेश कर्ज 95.85 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका था, जबकि साल भर पहले ये रकम 81.57 बिलियन डॉलर ही थी। इसमें से 69.90 बिलियन डॉलर का कर्ज पब्लिक सेक्टर पर है। प्राइवेट सेक्टर पर पिछले साल कुल विदेशी कर्ज 18.68 बिलियन डॉलर था, जो अब 25 बिलियन डॉलर से ऊपर हो गया है। इनमें सबसे ज्यादा कर्ज सिंगापुर और जर्मनी की कर्जदाता संस्थाओं से लिया गया है।

देश की फौरी चिंता 20.65 बिलियन के डॉलर के अल्प अवधि कर्ज की है, जिसे चुकाने की समय करीब आ गया है। बैंकरों की संस्था एसोसिएशन ऑफ बैंकर्स बांग्लादेश के अध्यक्ष सलीम आरएफ हुसैन ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि इस भुगतान में दिक्कत आ रही है, हालांकि बैंक रकम उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि विदेशी मुद्रा की कमी के कारण कई बैंकों को इस कार्य में दिक्कत पेश आ रही है।

विश्लेषकों ने कहा है कि इन्हीं समस्याओं के कारण आईएमएफ के दल की यात्रा बहुत अहम हो गई है। इस दौरान होने वाली बातचीत के नतीजों पर सारे देश का ध्यान टिका हुआ है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें