भारत और चीन के बीच सीमा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। लद्दाख में जारी सीमा विवाद में देपसांग मे भी गतिरोध बना हुआ है। यहां चीनी सैनिकों ने पेट्रोलिंग प्वाइंट 10, 11, 12 और 13 पर भारतीय पेट्रोलिंग को रोकना जारी रखा है। इन चारों प्वाइंट्स पर भारतीय सेना परंपरागत तरीके से पेट्रोलिंग करती आई है।
worldview.stratfor में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कई सालों के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और अतिक्रमण के बाद, चीन ने लद्दाख में भारतीय सीमा पर सैनिकों की उपस्थिति और पानी के जरिए प्रवेश करने के प्रयासों को तेज कर दिया है। लेकिन इससे पहले यह दिखाई देता, बीजिंग काफी हद तक अपना उद्देश्य हासिल कर चुका है।
हिमालय की तेज सर्दी में चीन एक बार और भारत के साथ गतिरोध बढ़ा सकता है, ताकि विवादित क्षेत्र चीन अपनी क्षमता के मुताबिक उपस्थिति बनाए रखे। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस @detresfa_ की सैटेलाइट तस्वीरें बताती हैं कि चीन ने देपसांग इलाके में 2000 में ही अपने पैर जमाना शुरू कर दिया था।
@detresfa_ (d-atis) ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल के जरिए बताया कि चीन ने 20 साल पहले से इस जगह पर अपना बेस बनाना शुरू कर दिया था। देपसांग इलाके में चीन ने 2013 में ही घुसपैठ की थी लेकिन उस वक्त भारतीय सेना के सामने चीन अपना लक्ष्य नहीं हासिल कर पाया था और भारतीय सेना ने चीन को खदेड़ दिया था।
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस @detresfa_ ने भौगोलिक जानकारी देने वाली कंपनी ईएसआरआई (ESRI) की सैटेलाइट तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि साल 2004 में भी इस इलाके में चीनी सेना के बेस देखे गए थे। इसके बाद साल 2010 में इस इलाके में चीनी सेना की गतिविधियां देखी गई थीं।
क्यों महत्वपूर्ण है देपसांग?
गलवां के ऊपर स्थित देपसांग रणनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये इलाका काराकोरम दर्रे से सटे रणनीतिक पर अहम दौलत बेग ओल्डी पर भारत के पोस्ट के करीब है। मंगलवार को दोनों देशों के कमांडर स्तर की बैठक हुई, जिसका कोई परिणाम नहीं निकला।
इसी की वजह से चीनी सेना ने देपसांग और पैंगोंग त्सो से अपनी सेना पीछे हटाने से इंकार कर दिया।