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UN: 'सभी धर्मों-सीमाओं, संघर्षों से परे है ध्यान, कूटनीति का साधन भी'; आध्यात्मिक व वैश्विक दिग्गजों के बयान

Sun, 22 Dec 2024 06:36 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

प्रमुख आध्यात्मिक एवं संयुक्त राष्ट्र नेताओं ने यहां प्रथम विश्व ध्यान दिवस के पर कहा कि ध्यान, सभी धर्मों एवं सीमाओं से परे है और बढ़ते संघर्षों एवं गहरे अविश्वास से भरे वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में कूटनीति का एक शक्तिशाली साधन भी है। आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कार्यक्रम के दौरान कहा, आज ध्यान कोई विलासिता नहीं है, बल्कि यह एक आवश्यकता है।
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प्रथम विश्व ध्यान दिवस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने प्रथम विश्व ध्यान दिवस के उपलक्ष्य में ‘वैश्विक शांति और सद्भाव के लिए ध्यान’ कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें संयुक्त राष्ट्र के राजदूत, अधिकारी, कर्मचारी, नागरिक संस्थाओं के सदस्य और भारतीय-अमेरिकी प्रवासी बड़ी संख्या में शामिल हुए। उन्होंने कहा, ध्यान एक ऐसी चीज है जिसे कोई भी, कभी भी और कहीं भी कर सकता है। एजेंसी
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ध्यान को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ध्यान को अपने जीवन का बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ध्यान किसी के जीवन में शांति और सद्भाव लाने का ताकतवर तरीका है। विश्व ध्यान दिवस पर उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, तकनीकी युग में एप-वीडियो हमारी दिनचर्या में ध्यान को शामिल करने में अच्छा साधन हो सकते हैं। मैं सभी से अपील करता हूं कि ध्यान को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाक इसकी क्षमता का अनुभव करें।

नेपाल : पीएम समेत हर कोई जुटा
नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली सहित सैकड़ों लोग 21 दिसंबर को काठमांडो स्थित आर्मी पवेलियन में विश्व के प्रथम अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिवस के लिए एकत्र हुए। उन्होंने विश्वव्यापी 32 घंटे के मैराथन ध्यान कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान ओशो तपोनन के स्वामी आनंद अरुण ने इसे गर्व की बात कहा।
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सद्गुरु ने कहा, यह बेहद अहम
आध्यात्मिक नेता सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस घोषित करने के संयुक्त राष्ट्र के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे मानसिक संतुलन और स्वास्थ्य के रूप में आज मानवता के सामने आने वाली सबसे बड़ी समस्याओं से उबरने के लिए अहम बताया।
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