नेपाल में अमेरिका से मिलने वाला 50 करोड़ डॉलर का एक अनुदान राजनीतिक विवाद में फंस गया है। मिलेनियम चैलेंजे कॉरपोरेशन (एमसीसी) कॉम्पैक्ट नाम की इस सहायता को लेकर उठे विवाद का साया अब संसद के सत्र पर पड़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। नेपाली संसद का शीतकालीन सत्र 14 दिसंबर से शुरू होने वाला है।
विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि शेर बहादुर देउबा सरकार ने तय समय से दो हफ्ते पहले ये सत्र बुलाया है। नेपाली मीडिया में कयास लगाए गए हैं कि इसके पीछे वजह एमसीसी से जुड़ा प्रस्ताव है। एमसीसी का मुख्यालय वाशिंगटन में है। वहां इस संस्था की बोर्ड मीटिंग 14 दिसंबर को होने वाली है। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार एमसीसी से जुड़े प्रस्ताव का संसद में तुरंत अनुमोदन करवाना चाहती है। लेकिन विपक्षी दलों- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) ने इस प्रस्ताव में कई संशोधन पेश कर दिए हैं।
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि सत्ता में रहते हुए सीपीएन-यूएमएल एमसीसी को मंजूरी देने के पक्ष थी। लेकिन अब उसने अपनी राय बदल ली है। अब नेपाल में ये प्रस्ताव गहरे मतभेद और राजनीतिक विभाजन का मसला बन गया है। उधर बताया जाता है कि इसके अनुमोदन में हो रही देर से अमेरिका की बेसब्री बढ़ रही है। पिछले दिनों अमेरिका ने इस संबंध में अपने कई अधिकारियों को नेपाल भेजा। उनमें एमसीसी के उपाध्यक्ष भी थे।
आलोचकों का कहना है कि एमसीसी को मंजूरी मिलने से देश पर अमेरिका का प्रभाव बढ़ेगा। लेकिन नेपाली कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वे ये सहायता लेने के पक्ष में हैं। असल में एमसीसी का प्रस्ताव 2017 में पहली बार आया था, जब शेर बहादुर देउबा प्रधानमंत्री थे। लेकिन उसके बाद कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में आ गई। बताया जाता है कि कम्युनिस्ट पार्टी में अंदरूनी मतभेदों के कारण उस दौरान ये बात आगे नहीं बढ़ सकी।
केपी शर्मा ओली सरकार में वित्त मंत्री युबराज खाटिवाड़ा ने एमसीसी संबंधी प्रस्ताव जुलाई 2019 में संसद में रखा था। लेकिन अब यूएमएल ने कहा है कि वह अपनी पूरी ताकत से इस प्रस्ताव का विरोध करेगी। नेपाल के प्रमुख अखबार काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री देउबा ने सितंबर में एमसीसी की उपाध्यक्ष फातेमा समर की काठमांडू यात्रा के दौरान यह आश्वासन दिया था कि एमसीसी से करार को संसदीय मंजूरी दिलाई जाएगी। नवंबर में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के दौरान ग्लासगो में देउबा ने यही आश्वासन वहां उनसे मिले एमसीसी अधिकारियों को दिया।
सितंबर में नेपाल के वित्त मंत्रालय ने एक पत्र के जरिए इस करार से संबंधित अपनी 11 चिंताओं और सवाल एमसीसी को भेजे थे। एमसीसी ने 13 पेज के एक पत्र में उन पर स्पष्टीकरण दिया। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि एमसीसी करार अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का हिस्सा है। ये रणनीति चीन को घेरने के लिए बनाई गई है। यूएमएल का कहना है कि इसलिए नेपाल को इससे अलग रहना चाहिए।