यूएन एजेंसी द्वारा गुरूवार को प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार सब सहारा अफ्रीका में अब भी लगभग 9 करोड़ 80 लाख बच्चे स्कूली शिक्षा से वंचित हैं और यहां ऐसे बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
स्कूली शिक्षा से वंचित रहने के लिए मजबूर बच्चों की संख्या में एशिया के मध्य व दक्षिणी क्षेत्र का दूसरा स्थान है, जहां ऐसे बच्चों की संख्या 8.5 करोड़ है।
खतरे में शैक्षिक लक्ष्य
यूनेस्को के महानिदेशक ऑड्रे अजोले ने हर बच्चे के शिक्षा प्राप्ति के अधिकार का सम्मान किए जाने की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी को भी यह स्थिति स्वीकार्य नहीं हो सकती कि उसे शिक्षा से वंचित रखा जाए।
उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि इन परिणामों को देखा जाए तो, संयुक्त राष्ट्र ने सभी के लिए 2030 तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्ति का जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसे हासिल करने की सम्भावनाओं पर जोखिम मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि हमें शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय एजेंडा की शीर्ष प्राथमिकता पर रखने के लिए वैश्विक सक्रियता की आवश्यकता है।
ऑड्री अजूले अपने इस संदेश को 19 सितंबर को यूएन मुख्यालय में होने वाले अति महत्वपूर्ण शिक्षा परिवर्तन सम्मेलन में भी पेश करेंगी।
लिंगानुपात हो रहा कम
यूनेस्को द्वारा प्रकाशित आंकड़ों में यह सकारात्मक पुष्टि भी की गई है कि दुनिया भर में स्कूली शिक्षा से वंचित रहने वाली लड़कियों और लड़कों का अन्तर समाप्त हो गया है। वर्ष 2000 में, प्राइमरी स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों में यह अन्तर 2.5 प्रतिशत था, और सेकेंडरी स्कूली शिक्षा के बच्चों में 3.9 प्रतिशत था। अब यह अंतर समाप्त होकर शून्य पर आ गया है हालांकि क्षेत्रीय स्तर पर कुछ अंतर अब भी मौजूद है।
यूक्रेनी बच्चों पर अब भी अनिश्चितता
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष-यूनीसेफ की कार्यकारी निदेशिका कैथरीन रसैल ने गुरूवार को कहा है कि यूक्रेन में इस समय लगभग 40 लाख बच्चों को एक अनिश्चितता से भरा स्कूली वर्ष शुरू करना पड़ रहा है।
कैथरीन रसैल ने यूक्रेन की तीन दिन की यात्रा पूरी की, जिस दौरान उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और अध्यापकों के साथ भेंट की, जो युद्ध से डरे हुए हैं। यह युद्ध का सातवां महीना चल रहा है। कैथरीन रसैल का कहना था कि बच्चे, अपनी स्कूली शिक्षा के लिए वापसी तो कर रहे हैं- मगर उनमें से बहुत से बच्चे युद्ध से त्रस्त हैं- जहां तबाही की दास्तानें फैली हुई हैं। इस बारे में भी अनिश्चितता है कि उनके अध्यापक और मित्र छात्र, क्या उनका स्वागत करने के लिए वहां मौजूद होंगे। बहुत से माता-पिता और अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने में झिझक रहे हैं क्योंकि उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा के बारे में जानकारी नहीं है।
यूक्रेन में युद्ध से हजारों स्कूल तबाह हो गए हैं या फिर क्षतिग्रस्त हुए हैं। देश के कुल स्कूलों में से 60 प्रतिशत से भी कम को फिर से खोलने के लिए उपयुक्त समझा गया है।
(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)