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1971 नरसंहार : पाकिस्तान की तय होगी जवाबदेही, पीड़ितों को मिलेगा न्याय, सबूत जुटा रहा यूरोपियन बांग्लादेश फोरम

Tue, 23 May 2023 06:21 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, ढाका।

सार

बॉम्मेल के नेतृत्व में यूरोपियन-बांग्लादेश फोरम (ईबीएफ) का अंतरराष्ट्रीय जांच दल बांग्लादेश में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ 1971 के नरसंहार के सबूत जुटाने पहुंचा है। जांचकर्ता 26 मई तक तहकीकात करेंगे।
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1971 नरसंहार (प्रतीकात्मक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पाकिस्तानी सेना को जल्द ही 1971 में बांग्लादेश में किए गए नरसंहार के लिए जवाबदेह ठहराते हुए इसे वैश्विक मान्यता देकर पीड़ित परिवारों को न्याय दिया जाएगा। यह दावा करते हुए पूर्व डच सांसद व मानवाधिकार कार्यकर्ता हैरी वैन बॉम्मेल ने कहा, यह नरसंहार इतिहास की सबसे क्रूरतम घटनाओं में से एक है।

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बॉम्मेल के नेतृत्व में यूरोपियन-बांग्लादेश फोरम (ईबीएफ) का अंतरराष्ट्रीय जांच दल बांग्लादेश में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ 1971 के नरसंहार के सबूत जुटाने पहुंचा है। जांचकर्ता 26 मई तक तहकीकात करेंगे। जांच दल में बॉम्मेल के अलावा नरसंहार विज्ञानी एंथनी होल्सलैग, राजनीतिक विश्लेषक क्रिस ब्लैकबर्न, ब्रिटिश ईबीएफ अध्यक्ष अंसार अहम उल्लाह और डच ईबीएफ अध्यक्ष बिकाश चौधरी बरुआ शामिल हैं। दल का लक्ष्य बांग्लादेश मुक्ति संग्राम नरसंहार की प्रत्यक्ष जानकारी हासिल करना है। दल के सदस्य बांग्लादेश में पीड़ित परिवारों, गवाहों, नरसंहार शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और सरकार के प्रतिनिधियों से मिलेंगे और राजधानी ढाका, चटगांव व हत्या स्थलों, युद्ध संग्रहालयों का दौरा करेंगे।

पांच करोड़ लोगों को छोड़ना पड़ा घर
नौ महीने चले इस युद्ध की वजह से पांच करोड़ से ज्यादा लोगों को हमेशा के लिए अपना घर छोड़ना पड़ा। वहीं, करीब चार करोड़ लोगों का बांग्लादेश में आंतरिक विस्थापन हुआ था। बांग्लादेश लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सहित तमाम मंचों से इस नरसंहार को मान्यता दिलाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है।
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अमेरिकी दखल से हुई देरी
बॉम्मेल ने कहा, यह नरसंहार शीत युद्ध के दौर में हुआ था, जब दुनिया अमेरिका और सोवियत संघ जैसी दो ताकतों के बीच बंटी थी। उस समय पाकिस्तान को अमेरिकी समर्थन मिला हुआ था। यहां तक कि अमेरिका इस युद्ध के लिए पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति कर रहा था। जबकि, बांग्लादेश के साथ खड़े भारत को सोवियत संघ के खेमे में माना जाता था। इस युद्ध में अमेरिकी भूमिका के चलते पाकिस्तानी सेना अब तक अपनी जवाबदेही से बचती रही।

30 लाख हत्याएं 2 लाख दुष्कर्म
25 मार्च, 1971 को शुरू हुए ऑपरेशन सर्चलाइट के तहत पाकिस्तानी सेना ने बांग्लादेश में 30 लाख से ज्यादा हत्याएं कीं और 2 लाख से ज्यादा औरतों के साथ दुष्कर्म किया।

  • बांग्लादेश में बौद्धिक, कार्यकर्ता, कलाकार, पत्रकार, राजनेता और हिंदुओं का कत्लेआम इतिहास की क्रूरतम और घृणित घटनाओं में से एक है।

वैश्विक मान्यता दिलाने का प्रयास
बॉम्मेल ने कहा, अर्मेनियाई नरसंहार को वैश्विक मान्यता मिलने में एक सदी से ज्यादा का वक्त लगा था। बांग्लादेश में हुए नरसंहार को भी आधी सदी बीत चुकी है।

  • उम्मीद है, दुनिया इसे मान्यता देने में अब और देर नहीं करेगी। आने कुछ वर्षों में बांग्लादेश नरसंहार के लिए पाकिस्तानी सेना को जवाबदेह ठहराया जाएगा और इसे वैश्विक मान्यता दी जाएगी।
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