अमेरिका के 15 राज्यों के एक गठबंधन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऊर्जा परियोजनाओं को तेजी से लागू करने के प्रयासों के खिलाफ मुकदमा किया है। इन राज्यों का कहना है कि ट्रंप का आदेश पर्यावरण संरक्षण कानूनों को नजरअंदाज करता है और इससे संकटग्रस्त प्रजातियों, महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवासों और सांस्कृतिक संसाधनों को नुकसान हो सकता है।
बता दें कि ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति बनने के पहले दिन एक आदेश जारी किया था, जिसमें राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित किया गया था। इस आदेश के तहत, तेल और गैस परियोजनाओं के लिए संघीय सरकार को निजी जमीन का इस्तेमाल करने का अधिकार मिल गया था। यह आदेश अमेरिकी सरकार को यह अनुमति देता है कि वह जरूरी वस्तुओं के उत्पादन के लिए निजी संपत्ति का इस्तेमाल कर सकती है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी माना जाता है।
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राज्य अटॉर्नी जनरल ने ट्रंप पर लगाए आरोप
हालांकि, राज्य अटॉर्नी जनरल का कहना है कि इस तरह के आदेश सिर्फ और सिर्फ वास्तविक आपातकालीन स्थितियों में ही दिए जाने चाहिए, जैसे कि बाढ़, तूफान या तेल रिसाव जैसी घटनाओं के बाद। उनका कहना है कि इस आदेश के तहत, जैसे अमेरिकी आर्मी कॉर्प्स और आंतरिक विभाग जैसी एजेंसियां कई आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर रही हैं, जिनमें क्लीन वाटर एक्ट और एंडेंजर्ड स्पीशीज एक्ट शामिल हैं।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने दी प्रतिक्रिया
अटॉर्नी जनरल के आरोपों पर व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह अधिकार केवल राष्ट्रपति को है, न कि राज्य अटॉर्नी जनरल या अदालतों को, कि वह तय करें कि क्या एक राष्ट्रीय आपातकाल है। रोजर्स ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देना देश की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।
'ट्रंप का आदेश अवैध'
इसके साथ ही राज्य अटॉर्नी जनरल का कहना है कि ट्रंप का आदेश अवैध है और यह संघीय एजेंसियों को अपने ही नियमों की अनदेखी करने के लिए मजबूर कर रहा है, जो कि पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचा सकता है। उनका कहना है कि जल, आर्द्रभूमि और संकटग्रस्त प्रजातियों को नुकसान पहुंचेगा। इसके साथ इन अटॉर्नी जनरल का कहना है कि यह आदेश राज्यों के अधिकारों को कमजोर करता है, क्योंकि क्लीन वाटर एक्ट के तहत राज्यों को अपने जल गुणवत्ता की रक्षा करने का अधिकार दिया गया है।
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क्या है राज्यों की मांग, समझिए
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ दायर मुकदमे में राज्यों की मांग है कि एक संघीय न्यायधीश इस आदेश को अवैध घोषित करें और गैर-आपातकालीन परियोजनाओं के लिए आपातकालीन अनुमति देने से रोकें। यह मुकदमा वाशिंगटन राज्य के अटॉर्नी जनरल निक ब्राउन और कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बांटा द्वारा दायर किया गया है, और अन्य कई राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने भी इसे समर्थन दिया है।