ब्रेग्टिज को पूरा करना ही लक्ष्य
गृहमंत्री प्रीती पटेल ने एसेक्स के विहटम संसदीय क्षेत्र से जीत दर्ज की हैं। इन्हें 32,876 वोट में से 24,082 वोट मिले हैं। जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने कहा कि ब्रेग्जिट को पूरा करना ही हमारा लक्ष्य है और हम अब उसको लेकर आगे बढ़ेंगे।
इंफोसिस के सह-संस्थापक के दामाद जीते
इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति के दामाद और ब्रिटेन सरकार में चीफ सेक्रेटरी ऑफ ट्रेजरी ऋषि सुनक ने भी जबरदस्त जीत हासिल की। उन्हें कुल पड़े 36,693 वोट में से 27,210 वोट मिले हैं।
आगरा के आलोक शर्मा भी जीते
आलोक शर्मा मूल रूप से आगरा के रहने वाले हैं। इन्होंने रीडिंग वेस्ट से जीत दर्ज की है। इन्हें कुल 24,393 वोट मिले हैं। आलोक पिछली सरकार में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। 2010 में कंजरवेटिव पार्टी की तरफ से रीडिंग वेस्ट सीट से सांसद चुने गए थे।
गोवा की सुएला ब्रेवरमैन भी जीतीं
गोवा मूल की सुएला ब्रेवरमैन ने फेयरहम सीट से जीत हासिल की है। इन्हें 36,459 में से 26,086 वोट मिले हैं। जीत हासिल करने के बाद इन्होंने मतदाताओं का धन्यवाद करते हुए अपने वादों को पूरा करने की बात कही है।
चार साल की उम्र में गए थे ब्रिटेन
शैलेष वारा ने नॉर्थ वेस्ट कैंब्रिजशायर सीट से जीत हासिल की है। वारा कंजरवेटिव पार्टी के पूर्व अध्यक्ष भी हैं। इनके माता-पिता गुजराती थे और इनका जन्म युगांडा में हुआ था। 1964 में चार साल की उम्र में परिवार के साथ ब्रिटेन गए और वहीं के होकर रह गए।
भारतीय मूल की महिला प्रत्याशी को हराया
तनमनजीत सिंह धेसी पहले पगड़ीधारी सांसद हैं। इन्होंने भारतीय मूल की ही कंवल गुर गिल को हराकर दोबारा साउथ-ईस्ट इंग्लैंड, एजबेस्टेन से अपनी सीट पक्की की है।
सड़क पर रहने वाले बच्चों का जीवन सुधारा
प्रीत कौर गिल पिछले चुनाव में जीत हासिल कर संसद पहुंचने वाली पहली सिख महिला थीं। इस बार भी इन्होंने बर्मिंघम एडबास्टन सीट को 21,217 वोटों से अपने नाम किया है। इजराइल और भारत में सड़क पर रहने वाले बच्चों का जीवन सुधारने के लिए भी इन्होंने काम किया है।
तीन भाषाओं के जानकार वरिष्ठ सांसद
भारतीय मूल के ब्रितानी नागरिक सांसद वीरेंद्र शर्मा ने भी एलिंग साउथ हॉल सीट से जीत दर्ज की है। इनका जन्म 1947 में भारत में हुआ था। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की है। ये तीन भाषाएं पंजाबी, हिंदी और ऊर्दू के जानकार हैं। पहली बार इस सीट ये 2007 में चुने गए थे।
पति दीपक ने दिया पूरा साथ
लिसा नैंडी ने भी विगन सीट 21,042 वोटों से जीत ली हैं। इनका जन्म मैनचेस्टर में हुआ था। इनके पिता ल्यूज नैंडी लिबरल पार्टी के सांसद थे। इन्होंने भारतीय मूल के दीपक नैंडी से शादी की जो मूल रूप से कोलकाता के रहने वाले हैं। चुनाव में जीत का श्रेय अपनी मेहनत के साथ दीपक को दिया है।
2011 में पहली बार पहुंची थीं संसद
भारतीय मूल की सीमा मल्होत्रा ने भी फेल्थम और हेस्टन सीट को 24,876 वोटों से जीत हासिल की है। इनके पिता का नाम सुशील कुमार मल्होत्रा और मां का नाम ऊषा मल्होत्रा है। 2011 में पहली बार उपचुनावों के बाद संसद पहुंची थीं।
बहन ने पद छोड़ा तो दूसरी बहन जीती
वलेरी वाज मूल रूप से गोवा की हैं। इन्होंने भी वालसॉल साउथ सीट को 20,872 वोटों से जीत लिया है। इन्होंने कंजरवेटिव पार्टी के भारतीय मूल की उम्मीदवार गुरजीत बेन्स को हरा दिया। इनकी बहन कीथ वाज का नाम स्कैंडल में सामने आया था जिसके बाद उन्होंने चुनाव से ऐन पहले पद छोड़ दिया था।