भारत ने स्थायी सिंधु आयोग की दो दिनी बैठक के अंतिम दिन पाकिस्तान से साफ कहा कि उसकी परियोजनाओं में सिंधु जल संधि का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। वह संबंधित मसलों के द्विपक्षीय हल के लिए भी कटिबद्ध है।
भारत ने यह बातें दिल्ली में आयोजित स्थायी सिंधु आयोग की 118 वीं बैठक में पाकिस्तान के सुझावों पर कही। यह बैठक मंगलवार को संपन्न हुई। सूत्रों ने बताया कि भारत ने बाढ़ के दौरान असाधारण रूप से अतिरिक्त पानी छोड़ने की पूर्व सूचना देने के पाकिस्तान के आग्रह पर साफ कहा कि वह पूर्व सूचना देता आ रहा है। बैठक में पाकिस्तान की आपत्तियों व तकनीकी मसलों पर विचार विमर्श नहीं हुआ।
दोनों देशों ने जल बंटवारे से संबंधित विवाद तय फ्रेमवर्क में ही सुलझाने पर प्रतिबद्धता जताई। वार्ता में दोनों पक्षों ने जल बंटवारे को लेकर व्यापक चर्चा की। आयोग की नई दिल्ली में दो दिनी बैठक खत्म होने के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा कि वार्ता के दौरान 31 मार्च, 2022 को खत्म हुए साल के लिए स्थायी आयोग की वार्षिक रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया गया और इस पर हस्ताक्षर किए गए।
मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और स्थायी आयोग ने दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता की सराहना की। आयोग की अगली बैठक पाकिस्तान में करने का फैसला लिया गया है। इसकी तारीख दोनों पक्षों की सहमति से तय होगी। वार्ता में भारतीय पक्ष का नेतृत्व भारतीय सिंधु जल आयुक्त एके पाल ने किया, जबकि पाकिस्तानी दल का नेतृत्व सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह कर रहे थे। पाकिस्तान का छह सदस्यीय दल वार्ता में हिस्सा लेने भारत आया था।
भारतीय परियोजनाओं पर आपत्ति
सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी पक्ष ने कश्मीर की पश्चिमी नदियों पर भारत द्वारा बनाए जा रहे जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और इस बारे में भारत से जवाब मांगा। इस दौरान एक हजार मेगावाट के पाकल ढुल परियोजना पर भी चर्चा हुई।
दौरे और निगरानी का मौका देगा भारत
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि भारत ने आगामी बारिश के मौसम में पाकिस्तानी दलों को दौरे और निगरानी का मौका देने पर सहमति जताई है।
नौ साल के मोल-भाव के बाद 1960 में हुआ था समझौता
भारत-पाकिस्तान के बीच नौ साल की बातचीत के बाद 1960 में सिंधु जल समझौता हुआ था। इसमें कश्मीर की पूर्वी नदियों सतलुज, ब्यास और रावी का 33 मिलियन एकड़ फीट पानी भारत को जबकि पश्चिम की नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का 135 एमएएफ पानी पाकिस्तान को देने पर सहमति बनी थी।