रूस से कच्चे तेल के ज्यादातर आयात पर रोक लगाने के लिए यूरोपियन यूनियन (ईयू) में हुए समझौते को इस समूह की एक बड़ी कामयाबी समझा जा रहा है। ईयू देशों के बीच सोमवार को सहमति बनी कि इस साल के अंत तक वे रूस से तेल के आयात में 90 फीसदी तक कटौती करेंगे। ईयू के कुल 27 सदस्य देश हैं। इनमें कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए के लिए रूस पर निर्भर हैं। इसलिए कुछ देश रूस से तेल और गैस आयात रोकने को लेकर उत्साहित नहीं रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अब हुए समझौते पर अमल हुआ, तो ज्यादातर ईयू देशों की अर्थव्यवस्था पर उसका खराब असर होगा। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से ईयू ने कई किस्तों में रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। ताजा समझौता उसी सिलसिले की अगली कड़ी है।
द्रुझबा गैस पाइपलाइन शामिल नहीं होगी
कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि ताजा समझौते पर अमल में अभी भी कई दिक्कतें आ सकती हैं। कुछ ईयू देशों में रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों की यह कह कर आलोचना की गई है कि ईयू यूक्रेन की मदद में अपने सदस्य देशों के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है, जबकि यूक्रेन ईयू का सदस्य भी नहीं है। कुछ विश्लेषकों ने ताजा समझौते में मौजूद खामियों की तरफ ध्यान खींचा है। इसके मुताबिक नए प्रतिबंध के लिए हुए इस समझौते के तहत द्रुझबा पाइपलाइन से आने वाली गैस पाइपलाइन शामिल नहीं होगी। इस पाइपलाइन के जरिए हंगरी, स्लोवाकिया और चेक रिपब्लिक को रूस से तेल सप्लाई होती है। इसका मतलब है कि इन देशों के साथ खास रियायत बरती गई है। ताजा समझौते के एलान के तुरंत बाद हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बान ने यूरोपीय आयोग की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईयू के सदस्य देशों की अर्थव्यवस्था को खतरे में डालना यूरोपीय आयोग का एक ‘गैर-जिम्मेदाराना’ कदम है। ऑर्बान का रुख शुरुआत से ही रूस के प्रति नरम रहा है। सोमवार को जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा- ‘हंगरी में रूसी तेल के आयात पर रोक लगाने की यूरोपीय आयोग की कोशिश को नाकाम करने में हम सफल रहे हैं।’
ताजा समझौता यूरोप की बड़ी जीत
पर्यवेक्षकों के मुताबिक ऑर्बान की इस टिप्पणी से उन लोगों को झटका लगा, जो ताजा समझौते को यूरोप की एक बड़ी जीत बता रहे थे। इस बीच यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उरसुला वॉन डेर लियेन ने कहा है कि द्रुझबा पाइपलाइन से तेल सप्लाई रोकने के मुद्दे पर फिर से चर्चा होगी। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि ये चर्चा कब होगी। विश्लेषकों ने कहा है कि इस तेल पाइपलाइन पर जारी विवाद से यह अनुमान और पुख्ता हुआ है कि रूस से गैस सप्लाई रोकने का मसला ईयू के लिए और बड़ा सिरदर्द साबित होगा। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ईयू क्षेत्र और रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले अन्य देशों में तेजी से बढ़ रही महंगाई के कारण अब इन देशों में प्रतिबंधों पर नए सिरे से सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि रूस को दंडित करने की कोशिश में अमेरिका और उसके साथी देशों ने अपनी जनता के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ब्रिटेन के मई महीने के आंकड़े बुधवार को जारी हुए। इसके मुताबिक वहां मई में खाद्य मुद्रास्फीति की दर 4.3 फीसदी तक पहुंच गई, जो अप्रैल 2012 के बाद की सबसे ऊंची दर है। ऐसी ही खबरें ईयू से भी आई हैं।