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नए व्यापार साथियों की तलाश में ब्रिटेन को मिला एक अहम मुकाम

Thu, 03 Jun 2021 06:02 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तोक्यो

सार

इस व्यापार समझौते की नींव उस समय पड़ी थी, जब अमेरिका में बराक ओबामा राष्ट्रपति थे। लेकिन 2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने इस करार से अमेरिका को बाहर निकाल लिया...
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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एशिया और प्रशांत क्षेत्र के 11 देशों के साथ व्यापार समझौते के लिए ब्रिटेन की वार्ता शुरू होने को एक महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। बुधवार को कॉम्प्रिहेंसिव एंड प्रोग्रेसिव एग्रीमेंट फॉर ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप (सीपीटीपीपी) के सदस्य 11 देशों ने इस बातचीत को हरी झंडी दे दी। जापान के आर्थिक पुनरुद्धार मंत्री योसुतोशी निशिमुरा को इन देशों ने बातचीत में अपना प्रतिनिधि बनाया है। निशिमुरा ने ध्यान दिलाया कि सीपीटीपीपी में शामिल देशों की साझा अर्थव्यवस्था यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बराबर है। विश्लेषकों ने कहा है कि इस समूह से जुड़ कर ब्रिटेन ब्रेग्जिट के बाद उसके सामने आई आर्थिक दिक्कतों का समाधान ढूंढ रहा है। ब्रेग्जिट के कारण ईयू का बड़ा बाजार उसकी पहुंच से दूर हो गया।

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ब्रिटिश अखबार द गार्जियन के मुताबिक ब्रिटेन की व्यापार मंत्री लिज ट्रुस ने सीपीटीपीपी से ब्रिटेन को जोड़ने को अपना प्रमुख एजेंडा बना लिया है। सीपीटीपीपी में शामिल देशों की कुल आबादी 50 करोड़ से ज्यादा है। इस रूप में भी ये देश यूरोपियन यूनियन (ईयू) की बराबरी करते हैं। सीपीटीपीपी में अभी ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, कनाडा, चिली, जापान, मलेशिया, मेक्सिको, न्यूजीलैंड, पेरू, सिंगापुर और वियतनाम शामिल हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ये देश ब्रिटेन को अपने साथ जोड़ कर आर्थिक और व्यापार मामलों में इस क्षेत्र में चीन के वर्चस्व का एक जवाब ढूंढने की कोशिश कर हे हैं।

पहली वार्ता के सीपीटीपीपी में शामिल देशों ने एक साझा बयान में कहा कि ब्रिटेन के साथ वार्ता शुरू होने से सीपीटीपीपी के संभावित विस्तार को लेकर एक अच्छा संकेत जाएगा। इससे सीपीटीपीपी के दुनियाभर के सहयोगी देशों को ये संदेश मिलेगा कि ये समूह मुक्त, न्यायपूर्ण, खुले, प्रभावी, समावेशी और नियम आधारित व्यापार के प्रति वचनबद्ध हैं। इस व्यापार समझौते की नींव उस समय पड़ी थी, जब अमेरिका में बराक ओबामा राष्ट्रपति थे। तब की योजना के मुताबिक इसमें अमेरिका को भी शामिल होना था। अमेरिका और जापान ने इसे चीन के जवाब के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। लेकिन 2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने इस करार से अमेरिका को बाहर निकाल लिया।
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टोक्यो के अखबार जापान टाइम्स में छपे विश्लेषण के मुताबिक ट्रंप के उस कदम से चीन को लाभ हुआ। पिछले साल सीपीटीपीपी में शामिल कई देशों ने चीन के साथ मिल कर क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक सहयोग (आरसीईपी) करार लिया। आईसीईपी में शामिल देशों में जापान और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं। उधर ब्रेग्जिट के बाद से ब्रिटेन नए व्यापार सहभागियों की तलाश में जुटा रहा है। इस सिलसिले में उसने जापान, कनाडा, सिंगापुर, और वियतनाम के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते किए हैं। बताया जाता है कि उसकी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रूनेई, मेक्सिको, मलेशिया और पेरू के साथ भी वार्ता चल रही है। लेकिन अब अगर वह सीपीटीपीपी में शामिल हो जाता है, तो इन अलग समझौतों की जरूरत शायद खत्म हो जाएगी।

ब्रिटेन ने सीपीटीपीपी में शामिल होने के लिए औपचारिक अनुरोध पिछली फरवरी में भेजा था। अब उस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। ब्लूमबर्ग के विश्लेषक माइक डेनिस ने इस बारे में कहा है कि एशिया के देशों की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। उनके साथ जुड़ने से ब्रिटेन के आर्थिक विकास में तेजी आएगी।

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