नौकरी, उद्योग, व्यापार सहित अन्य कारणों से अपना देश छोड़ दूसरे देशों रहने वालों भारतवंशियों की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है। संयुक्त राष्ट्र संघ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में जन्मे 1.75 करोड़ लोग अलग-अलग देशों में रहते हैं। यह कुल प्रवासी आबादी का 6.43 फीसदी है। दूसरे नंबर पर मैक्सिको है, जिसकी करीब 1.20 करोड़ आबादी दूसरे देशों में रहती है।
यह रिपोर्ट बताती है कि भारत में 51.54 लाख अंतरराष्ट्रीय प्रवासी हैं। यह आंकड़ा 1990 में 76 लाख था, जिसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई। 2015 के 52.41 लाख मुकाबले 2019 में सबसे कम गिरावट रही। 2010 से 2019 के दौरान देश की कुल आबादी में प्रवासियों की हिस्सेदारी 0.4 प्रतिशत है, जबकि 1990 में यह आंकड़ा 0.9 प्रतिशत था।
भारत में बसे प्रवासियों में 2.07 लाख शरणार्थी भी हैं। यह कुल प्रवासियों का चार प्रतिशत है। 1990 में देश में 2.12 लाख शरणार्थी थे और तब उनका अनुपात 2.8 प्रतिशत था। हमारे यहां पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से सर्वाधिक शरणार्थी आए हैं। इनमें से 48.8 प्रतिशत महिलाएं हैं। वहीं औसत उम्र 47.1 वर्ष है, जिनमें 71 प्रतिशत 20 से 64 वर्ष और 20 प्रतिशत 64 वर्ष से अधिक आयु के हैं।
एक तिहाई अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दुनिया के 10 सबसे ज्यादा प्रवासी देने वाले देशों से हैं। भारत व मैक्सिको के बाद चीन के 1.07 करोड़, रूस के 1.05 करोड़, सीरिया के 82 लाख, बांग्लादेश के 78 लाख, पाकिस्तान के 63 लाख, यूक्रेन के 59 लाख, फिलीपींस के 54 लाख और अफगानिस्तान के 51 लाख प्रवासी हैं।
दुनिया में सबसे ज्यादा 5.10 करोड़ प्रवासी अमेरिका में है। यह कुल प्रवासियों का 19 प्रतिशत है। इसके बाद जर्मनी और सऊदी अरब में 1.30 करोड़ प्रवासी हैं। रूस में 1.2 करोड़, ब्रिटेन में एक करोड़, यूएई में 90 लाख, फ्रांस, कनाडा व ऑस्ट्रेलिया में आठ लाख और इटली में छह लाख प्रवासी हैं।