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26/11 हमला: दस वर्षों में कितना बदला सीएसटी स्टेशन, 52 लोगों की गई थी जान

Wed, 21 Nov 2018 11:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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आतंकी कसाब
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उस समय रात का 9.30 बजा था। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर धीरे-धीरे भीड़ छटने लगी थी कि तभी  सेंट्रल रेलवे हेडक्वार्टर बिल्डिंग में गोली की आवाजों के बीच चारों तरफ सिर्फ चीख पुकार और चित्कार की आवाजें आने लगीं। हर तरफ लोग भाग रहे थे, हर कोई अपनी जान बचाना चाह रहा था। आतंकियों की बंदूकों से निकली गोली ने करीब 52 लोगों की जान ले ली थी। आज उस पूरी वारदात को करीब दस साल हो चुका है। वह 26 नवंबर की काली रात थी। यह वही दिन है जब मुंबई में आज तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला किया था। आतंकी अजमल कसाब ने यहीं अपने साथियों के साथ स्टेशन पर मौजूद लोगों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। 

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दस साल बीत जाने के बाद क्या हाल है इस रेलवे स्टेशन का। विश्व का सबसे व्यस्ततम रहने वाले रेलवे स्टेशन का नाम ही नहीं बल्कि इसके स्ट्रक्चर में भी बड़े बदलाव किए जा चुके हैं। यहां तक कि इसके नाम में महाराज शब्द जोड़ दिया गया है। यही नहीं इन दस वर्षों में इस स्टेशन का पूरा कायाकल्प हो चुका है। इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम के साथ-साथ विशेष डॉग स्काव्यड टीम भी है।

स्टेशन पर सुरक्षा की निगरानी कर रहे वरिष्ठ आरपीएफ अधिकारी सचिन भालोडे ने बताया कि पिछले दस वर्षों में स्टेशन सुरक्षा की दृष्टी से काफी हाईटेक हो चुका है। स्टेशन पर 302 सीसीटीवी कैमरा, तीन गाड़ियों की जांच करने वाले स्कैनर, तीन सामान को स्कैन करने वाले बैगेज के साथ-साथ 32 मेटल डिटेक्टर और 76 हाथ से चेक करने वाले मेटल डिटेक्टर लगे हैं।
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यही नहीं हर दिन करीब 250 आरपीएफ के सुरक्षा अधिकारी यहां गश्त करते हैं। समय-समय पर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए ड्रिल कराई जाती है। स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद करने के लिए विशेष डॉग स्क्वायड टीम दी गई है जिसमें करीब 8 कुत्ते शामिल हैं। ये कुत्ते लंबी दूरी की ट्रेन में तीन शिफ्ट में निगरानी रखते हैं। 

अधिकारी ने स्टेशन के बारे में बताया कि अगर कोई थ्रेट कॉल आती है तब हम पूरी चेकिंग करते हैं। पिछले दिनों एक यात्री ने ट्रेन के एक पार्सल में बम होने की बात कही जिसके बाद हमने पूरी ट्रेन की चेकिंग की।

स्टेशन में किए गए बदलावों के बारे में आरपीएफ के कमिशनल निकेत कौशिक ने कहा कि अब रेल मंत्रालय दूसरे फेज की सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी में है। इसमें छह से आठ लोगों की एंटी सबोटाज चेक और विशेष क्वीक रिएक्शन टीम स्टेशन पर रहेगी।  

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पांच दिन बाद ही मुंबई हमलों की दसवी बरसी है। 26 नवंबर 2008 को अजमल कसाब समेत 10 आतंकवादियों ने 166 लोगों की जान ली थी और तीन दिन तक पूरा शहर एक तरह से बंधक बना कर रखा था। दस वर्षों से इस हमले के लिए भारत पाकिस्तान को दोषी मानता रहा है। भारत के पास इसके पुख्ता सबूत भी हैं कि आतंकवादी पाकिस्तान से आए और हमलों के दौरान पाकिस्तान में बैठे उनके आका उन्हें सेटेलाइट फोन पर निर्देश दे रहे थे। इस हमले के बाद भारत पाक्सितान के रिश्तों में और खटास आई। 

26/11 की रात मुंबई की जगहों पर आतंकी हमला हुए थे। आतंकी अजमल  कसाब को मुंबई की छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। हमले के दौरान अकेले इस जगह पर 60 लोगों की मौत हुई थी।  कसाब ने लोगों की भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चलाई थी।

 बाद में उसे हवालदार तुकाराम ओम्बले ने पकड़ लिया हालांकि इस दौरान हुई झड़प में वह शहीद हो गए। गिरफ्तार करने के बाद कसाब को मुंबई की आर्थर रोड जेल के खास बुलेटप्रूफ सेल में रखा गया था। इस खास सेल को बनाने पुरे पांच करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च किये गए।

इसके अलावा कसाब की सुरक्षा में आईटीबीपी के 300 से ज्यादा कमांडो का दस्ता तैनात था और इतने सालों में कई सौ करोड़ रुपये उसे सुरक्षित रखने में खर्च किए गए, कसाब को आखिर में फांसी दी गई ।
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