West Bengal recruitment scam: Calcutta high court
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क्या किसी परीक्षा में एक साथ 1698 उम्मीदवारों को एक समान नंबर आ सकते हैं। लेकिन यह हुआ है बंगाल के स्कूलों के लिए ग्रुप डी यानी चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए अवैध रूप (West Bengal recruitment scam) से पैनल में शामिल किए गए उम्मीदवारों के साथ। उन सभी को एक समान नंबर मिले हैं। यह देखकर कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय ने भी हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि सर्वर में जाकर इस तरह की करामात तो भूत ही कर सकता है।
जानकारी के मुताबिक हुआ यह कि ओएमआर शीट में जिन्हें 41 अंक मिले हैं, उन्हें स्कूल सेवा आयोग के सर्वर में 43 अंक मिले हैं और जिन्हें शून्य मिला है, उन्हें भी सर्वर में 43 नंबर मिला है। सीबीआई ने जब इसका खुलासा किया कि पैनल में शामिल 1698 उम्मीदवारों में सभी को एक समान 43 अंक मिले हैं, तो न्यायाधीश ने भी हैरानी जताई। सुनवाई के दौरान इस पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय ने कहा, मैं ऐसी समानता से आश्चर्यचकित हूं और व्यंग्य भरे लहजे में कहा, नंबर थोड़ा और कम-ज्यादा भी दिया जा सकता था। कोई भूत ही सर्वर में जाकर इस तरह की करामात कर सकता है। न्यायाधीश गंगोपाध्याय के आदेश पर सीबीआई ने उन सभी उत्तर पुस्तिकाओं को सील कर दिया है।
सीबीआई के वकील ने कहा कि यह चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की भर्ती में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के सबूत हैं। हाल ही में न्यायमूर्ति बिस्वजीत बोस की पीठ ने कहा था कि स्कूलों में अवैध रूप से नियोजित कर्मचारियों को किसी भी तरह से स्कूल में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों में कर्मचारी कार्यरत हैं, उनके प्रधानाध्यापकों को संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षकों के माध्यम से मामले की जानकारी दी जाए। हालांकि राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में कहा कि अगर चौथी श्रेणी के कर्मचारी स्कूल नहीं जाते हैं, तो खिड़क़ी और दरवाजे खोलने वाला कोई नहीं होगा।