भारतीय फुटबॉल के सितारे और ओलंपिक खेलने और एशिनय गेम्स में भारत को गोल्ड जिताने वाले प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी तुलसीदास बलराम का गुरुवार को कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। इसके साथ ही भारत को गोल्ड जिताने वाली टीम का आखिरी किला भी ढह गया। वह महानगर से दूर हुगली जिले के उत्तरपाड़ा में नदी किनारे एक फ्लैट में रहते थे।
सूत्रों ने बताया कि तबीयत बिगड़ने पर 26 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनको यूरिनरी इनफेक्शन की पुष्टि हुई थी। लगातार इलाज चल रहा था लेकिन हालत में सुधार नहीं हो रही थी। गुरुवार दोपहर बाद उन्होंने आखिरी सांस ली। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरूप बिस्वास लगातार संपर्क में थे और हर संभव मदद कर रहे थे। बलिराम के निधन पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी दुख जाहिर किया है और कहा है कि उनका जाना खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
अपूरणीय क्षति, उनका सानिध्य पाना ही जीवन की पूंजी: थापा
एशिया गेम्स में भारत को मेडल दिलाने वाले खिलाड़ी श्याम थापा ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा, आज बहुत ही दुखद घड़ी है। उन्होंने कहा, आज देश के लिए ओलंपिक खेलने वाली टीम का आखिरी किला भी ढह गया। ओलंपियन तुलसीदास बलराम ने 1950 से 1960 के बीच चुन्नी गोस्वामी, पीके बनर्जी, राम बहादुर और जरनैल सिंह के साथ भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था। वह भारतीय फुटबॉल टीम में सेंटर फॉरवर्ड और लेफ्ट विंग के तौर पर खेलते थे। उनका जीवन बहुत एकाकी था। वे ईस्ट बंगाल क्लब के लिए खेलते थे। उन्होंने बताया कि वे महान खिलाड़ी थे। उनके जाने से बंगाल ही नहीं अपितु देश को अपूरणीय क्षति हुई है। आज का दिन मेरे लिए दुखद दिन है। मुझे उनका सानिध्य मिला। मैं उन्हें लेकर देहरादून गया था और ओलंपियन राम बहादुर से मिलाया था। वे बहुत ही सह्रदय व्यक्तित्व के धनी थे। लेकिन वे खेल को अलविदा कहने के बाद एकांत जीवन जी रहे थे। अचानक उनके निधन की खबर सुनकर आश्चर्यचकित हूं। ऐसा महान खिलाड़ी हमको छोड़कर ऐसे चला जाएगा, कभी सोचा नहीं था।